राजस्थान के किसानों की चमकेगी किस्मत, प्राकृतिक खेती करने पर सरकार देगी 2.50 लाख किसानों को 4000 रुपये

राजस्थान सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब प्रदेश के ढाई लाख किसान आधुनिक तकनीकों और पुरानी परंपराओं के संगम से प्राकृतिक खेती करेंगे. इस योजना के तहत न केवल सीधे नकद आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि गांवों में विशेष संसाधन केंद्र भी खोले जाएंगे. खेती की नई क्रांति में आप भी शामिल हों.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 Jan, 2026 | 04:55 PM

Rajasthan Agriculture Scheme : राजस्थान की रेतीली धरती पर अब एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है. कल्पना कीजिए एक ऐसी खेती की, जिसमें न महंगे यूरिया की जरूरत हो और न ही जहरीले डीएपी का डर. राजस्थान सरकार ने प्रदेश के किसानों को केमिकल के चक्रव्यूह से बाहर निकालने के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है. बजट 2025-26 के इस खास विजन के तहत अब प्रदेश के ढाई लाख किसान प्राकृतिक योद्धा बनकर धरती की सेहत सुधारेंगे. यह सिर्फ खेती का तरीका बदलने की कोशिश नहीं है, बल्कि किसानों की जेब भरने और आम जनता को शुद्ध खाना खिलाने की एक बड़ी मुहिम है.

4000 रुपये का प्रोत्साहन ईनाम

सरकार जानती है कि खेती का तरीका  बदलना आसान नहीं होता, इसलिए उन्होंने किसानों का हाथ थामने का फैसला किया है. इस योजना के तहत चुने गए 2.50 लाख किसानों को प्रति एकड़ 4000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. यह पैसा सीधा किसानों के बैंक खाते में भेजा जा रहा है ताकि वे बिना किसी आर्थिक तंगी के प्राकृतिक खेती  की शुरुआत कर सकें. इस बजट में केंद्र सरकार 60 फीसदी र राज्य सरकार 40 फीसदी का हिस्सा दे रही है, जबकि कुछ किसानों का पूरा खर्च अकेले राजस्थान सरकार उठा रही है.

अब घर बैठे मिलेगी हर जानकारी

योजना को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने इसे बेहद आसान बना दिया है. पूरे प्रदेश में 2000 क्लस्टर (समूह) बनाए गए हैं. हर समूह में 125 किसानों को जोड़ा गया है. इन किसानों को ट्रेनिंग  देने की जिम्मेदारी कृषि सखियों और विशेष मास्टर ट्रेनर्स को दी गई है. ये कृषि सखियां गांव-गांव जाकर किसानों को समझाएंगी कि बिना केमिकल के भी बंपर पैदावार कैसे ली जा सकती है. इससे किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि मदद खुद चलकर उनके खेत तक आएगी.

संसाधन केंद्र के लिए 1 लाख रुपये की मदद

अक्सर किसानों की चिंता होती है कि अगर बाजार से खाद नहीं लाएंगे तो फसल कैसे बढ़ेगी? इसका समाधान है बायो इनपुट संसाधन केंद्र. सरकार एक ऐसा केंद्र बनाने के लिए 1 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि दे रही है. यहां किसान खुद ही जीवामृत और जैविक कीटनाशक  तैयार कर सकेंगे. प्रदेश में अब तक 180 ऐसे केंद्र शुरू भी हो चुके हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान का बाजार पर निर्भर होना खत्म हो जाएगा और खेती की लागत लगभग जीरो हो जाएगी.

क्या है इस मिशन का असली लक्ष्य?

राजस्थान का यह मॉडल आने वाले समय में पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा. प्राकृतिक खेती से मिट्टी  की उपजाऊ शक्ति वापस लौटती है और पानी की खपत भी कम होती है. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ सालों में राजस्थान के हर जिले में केमिकल फ्री जोन हों. जब किसान को कम लागत में अच्छी फसल मिलेगी और सरकार से 4000 रुपये जैसी मदद मिलेगी, तो निश्चित रूप से राजस्थान की खेती की सूरत बदल जाएगी. यह योजना खेती को फिर से मुनाफे का सौदा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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