Potato Farming: आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में ठंड कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही है. इससे फसल में झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ गई है. ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि अगर समय पर इलाज की व्यवस्था नहीं की गई तो पैदावार प्रभावित हो सकती है. हालांकि, किसानों को चिंत करने की जरूरत नहीं है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि घना कोहरा और सूरज की रोशनी की कमी के कारण यह झुलसा आसानी से पनपता है. लेकिन इसके प्रकोप से फसल को बचाया जा सकता है.
दरअसल, झुलसा रोग सबसे पहले पत्तियों पर भूरे-काले धब्बों के रूप में दिखाई देता है और धीरे-धीरे पूरे पौधे को प्रभावित करता है. अधिक नमी, ठंडा मौसम और लगातार ओस गिरने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोग 25-40 फीसदी तक उपज को नुकसान पहुंचा सकता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे तुड़ाई के समय झुलसा रोग की निगरानी करें और जिस पौधे में यह प्रकोप दिखाई दे, उसे तुरंत हटा दें. समय पर कदम न उठाने पर उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है.
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कॉपर-आधारित फफूंदनाशकों का छिड़काव करें
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि फसल की सुरक्षा के लिए समय पर रोकथाम बेहद जरूरी है. आलू और टमाटर की फसल में पत्तियों को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैनकोजेब, क्लोरोथैलोनिल या कॉपर-आधारित फफूंदनाशकों का छिड़काव करें. साथ ही, फसल की नियमित निगरानी भी जरूरी है. विशेषज्ञों ने कहा कि दवाओं का छिड़काव संतुलित मात्रा में ही करें, क्योंकि अधिक मात्रा में उपयोग करने से नकारात्मक असर पड़ सकता है. अगर फसल में उत्पादन में भारी कमी आने लगे, तब भी किसान इन दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं.
इस दवा का करें छिड़काव
एक्सपर्ट के मुताबिक, आलू और टमाटर की फसल को झुलसा रोग से बचने के लिए किसान रासायनिक उपायों के अलावा प्राकृतिक तरीके भी अपना सकते हैं. इसके लिए 5 लीटर गोमूत्र में 200 ग्राम नीम की पत्तियां उबालकर ठंडा करने के बाद छान लें और इसमें 50 ग्राम साबुन का घोल मिलाकर फसल पर छिड़काव करें. यह फंगल रोग को रोकने में मदद करता है. इसके अलावा, लहसुन और हरी मिर्च का घोल बनाकर सप्ताह में एक बार छिड़काव करने से भी झुलसा रोग कम होता है. फसल में हवा का सही संचार बनाए रखना जरूरी है और इस समय अधिक सिंचाई से बचें. छिड़काव हमेशा सुबह के समय ही करें.