जैविक काली-पीली हल्दी की खेती से लाखों की कमाई, किसान राजीव अचार बनाकर कर रहे बिक्री

Success Story: मध्य प्रदेश के भिंड के किसान राजीव शर्मा ने सिर्फ एक एकड़ में जैविक काली और पीली हल्दी की खेती कर सफलता की नई मिसाल कायम की है. हल्दी उत्पादन के साथ अचार बनाकर वैल्यू एडिशन से करीब 4 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 22 Jul, 2026 | 11:17 AM

Success Story: पारंपरिक खेती से सीमित मुनाफा मिलने की चुनौती के बीच मध्य प्रदेश के भिंड जिले के ग्राम दबोहा के किसान राजीव शर्मा (Rajeev Sharma) ने जैविक खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है. उन्होंने एक एकड़ भूमि में जैविक काली और पीली हल्दी की खेती शुरू कर न केवल अच्छी आमदनी हासिल की, बल्कि मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के जरिए अपनी आय को भी बढ़ाया. आज उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर की जाए, तो कम क्षेत्र में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है.

एक एकड़ से शुरू हुई लाभदायक खेती

मध्य प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार राजीव शर्मा ने करीब एक एकड़ खेत में लगभग 1 लाख रुपये की लागत से जैविक काली और पीली हल्दी की खेती  शुरू की. उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक तरीकों को अपनाया, जिससे उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर रही और बाजार में इसकी मांग भी बढ़ी. हल्दी की यह फसल तैयार होने में करीब 230 से 240 दिन का समय लेती है. इस अवधि के बाद खेत से लगभग 100 क्विंटल कच्ची हल्दी का उत्पादन प्राप्त होता है. उत्पादन की अच्छी मात्रा और गुणवत्ता ने उनकी खेती को लाभ का सौदा बना दिया.

सुखाने के बाद तैयार होती है 20 क्विंटल हल्दी, लाखों की होती है कमाई

कटाई के बाद कच्ची हल्दी को वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जाता है. सुखाने के बाद इसका वजन घटकर लगभग 20 क्विंटल तैयार हल्दी रह जाता है. यही तैयार उत्पाद बाजार में बेहतर कीमत दिलाता है. राजीव शर्मा बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद उन्हें करीब 4 लाख रुपये की आय प्राप्त होती है. यानी एक एकड़ में की गई खेती से लागत निकालने के बाद भी अच्छा मुनाफा मिलता है. उनकी सफलता यह दिखाती है कि पारंपरिक फसलों की तुलना  में औषधीय और मसाला फसलों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन सकती है.

हल्दी बेचने तक सीमित नहीं, अचार बनाकर बढ़ाई कमाई

राजीव शर्मा केवल कच्ची या सूखी हल्दी बेचकर ही संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने कच्ची हल्दी का अचार तैयार कर मूल्य संवर्धन का रास्ता अपनाया. इससे उन्हें अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलने लगी और आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी तैयार हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान केवल कच्चा उत्पाद बेचने  के बजाय उससे जुड़े प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करें, तो उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. राजीव शर्मा का यह मॉडल इसी सोच का सफल उदाहरण है.

जैविक खेती और वैल्यू एडिशन बना सफलता का मंत्र

राजीव शर्मा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि खेती में नई सोच और आधुनिक विपणन रणनीति अपनाकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. जैविक उत्पादन  के कारण उनके उत्पाद को अलग पहचान मिली, जबकि वैल्यू एडिशन ने कमाई को और बढ़ा दिया. उनकी सफलता अब आसपास के किसानों को भी जैविक खेती की ओर प्रेरित कर रही है. कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को जैविक मसाला फसलों की खेती और प्रसंस्करण अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सके. राजीव शर्मा की कहानी यह संदेश देती है कि सही योजना, जैविक खेती और मूल्य संवर्धन के जरिए किसान कम भूमि में भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.

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Published: 22 Jul, 2026 | 10:54 AM

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