Mandi Bhav: होली के बाद सब्जियां हुईं महंगी, 30 रुपये किलो हुआ आलू तो 35 रुपये किलो बिक रहा प्याज

नवी मुंबई की वाशी APMC मंडी में माठाडी मजदूरों के 50 किलो बोरी नियम के कारण आलू-प्याज का व्यापार प्रभावित हो गया है. ट्रकों से माल उतारने में देरी और कम आवक के चलते थोक व खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे मुंबई में आलू और प्याज महंगे हो गए हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Mar, 2026 | 12:21 PM

Potato Price Hike: नवी मुंबई के कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के प्याज-आलू थोक बाजार में व्यापार प्रभावित हो गया है. 1 मार्च से माठाडी मजदूरों (सिर पर बोझ ढोने वाले कामगार) ने नियम लागू कर दिया है कि बाजार में आने वाली हर बोरी का वजन अधिकतम 50 किलो ही होगा. इस नियम के कारण व्यापारियों ने नई खेप मंगाना फिलहाल रोक दिया है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो गई है और थोक कीमतें बढ़ने लगी हैं. इससे रिटेल मार्केट में आलू और प्याज महंगा हो गया है. अभी मुंबई में आलू 30 रुपये किलो और प्याज 35 रुपये किलो हो गया है. ऐसे में आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है.

व्यापारियों का कहना है कि मजदूर तय सीमा से ज्यादा वजन वाली बोरियां उतारने से मना कर रहे हैं, जिससे माल उतारने की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है. बाजार परिसर के अंदर सब्जियां लेकर आए ट्रकों की लंबी कतार लग गई है. स्थिति को देखते हुए व्यापारियों ने किसानों और ट्रांसपोर्टरों से कहा है कि जब तक यह समस्या हल नहीं हो जाती, तब तक नई खेप बाजार में न भेजें. वाशी स्थित कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के प्याज-आलू बाजार में आमतौर पर हर दिन महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों से करीब 1,000 से 2,000 ट्रक माल पहुंचता है. लेकिन पिछले कुछ दिनों में बोरियां उतारने में हो रही देरी के कारण मंडी में आने वाले ट्रकों की संख्या काफी कम हो गई है.

क्या कहते हैं मजदूर

मंडी में काम करने वाले माठाडी मजदूर शिवराम सकपाल ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि उनकी मांग है कि हर बोरी का वजन अधिकतम 50 किलो ही होना चाहिए. उन्होंने कहा कि 50 किलो तक की बोरियां वे उतार देंगे, लेकिन 55, 60 या 65 किलो वजन वाली बोरियां उठाने का काम नहीं करेंगे. उनका कहना है कि भारी बोरियां उठाने से मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर खतरा होता है, इसलिए वे कई सालों से यह मांग उठा रहे हैं.

थोक मार्केट में आलू और प्याज के रेट

इस समस्या का असर अब थोक बाजार की कीमतों पर भी दिखने लगा है. व्यापारियों के मुताबिक वाशी APMC में पहले आलू की कीमत लगभग 8-10 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर करीब 15 रुपये प्रति किलो हो गई है. वहीं प्याज की कीमत  भी पहले करीब 10- 12 रुपये प्रति किलो थी, जो पिछले कुछ दिनों में कम आवक और माल उतारने में देरी के कारण बढ़कर लगभग 15- 16 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.

आलू की आवक काफी कम हो गई है

व्यापारियों के अनुसार आलू की आवक काफी कम हो गई है और कई ट्रक करीब तीन दिन तक मंडी में खड़े रहे, क्योंकि उनका माल उतारा नहीं जा सका. उन्होंने कहा कि तीन दिन तक ट्रकों में पड़े रहने से आलू खराब होने लगे, इसलिए नुकसान से बचने के लिए व्यापारियों को उन्हें कम कीमत पर बेचकर स्टॉक खाली करना पड़ा. वहीं दूसरी तरफ नई खेप कम आने से बाजार में कीमतें बढ़ने लगी हैं.

रिटेल मार्केट में आलू-प्याज के दाम बढ़े

इसका असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है. व्यापारियों के मुताबिक मुंबई और नवी मुंबई में करीब 10 दिन पहले आलू 20- 26 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो अब बढ़कर लगभग 22- 30 रुपये प्रति किलो हो गया है. वहीं प्याज की कीमत भी पहले 20- 28 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर करीब 25- 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.

इन राज्यों से मंडी में आता है आलू

व्यापारियों के अनुसार आलू की खेप आमतौर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों से आती है, हालांकि इस समय ज्यादातर सप्लाई गुजरात से हो रही है. कई जगहों पर आलू की पैकिंग वहीं पर की जाती है, इसलिए मंडी तक पहुंचने वाली बोरियों का वजन अक्सर 50 किलो से ज्यादा हो जाता है. ऐसे में यहां के व्यापारियों के पास बोरी के वजन को नियंत्रित करने का ज्यादा विकल्प नहीं रहता.

प्याज की सप्लाई लासलगांव मंडी से होती है

वहीं प्याज की सप्लाई ज्यादातर महाराष्ट्र के नासिक और लासलगांव  जैसे बाजारों से आती है, जहां माठाडी यूनियन भी मौजूद हैं. व्यापारियों का कहना है कि वहां के मजदूर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि मंडी भेजने से पहले बोरियों का वजन 50 किलो की सीमा के अंदर ही पैक किया जाए. हालाकि, APMC प्रशासन ने पहले ही व्यापारियों को सलाह दी थी कि 50 किलो से ज्यादा वजन वाली बोरियां मंडी में न भेजी जाएं. लेकिन कमीशन एजेंटों का कहना है कि इसके लिए व्यापारियों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, क्योंकि बोरियों की पैकिंग तो माल भेजने वाली मंडियों में ही होती है.

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Published: 7 Mar, 2026 | 12:11 PM
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