Organic Farming: आज खेती में सबसे बड़ी चिंता है बढ़ता खर्च और घटती मिट्टी की ताकत. रासायनिक खाद महंगी भी है और लंबे समय में जमीन को कमजोर भी करती है. ऐसे में कई किसान अब फिर से देसी तरीके अपना रहे हैं. गोबर और गोमूत्र से तैयार पंचगव्य नाम का जैविक टॉनिक खेतों में नई जान डाल रहा है. यह सस्ता है, घर पर बन जाता है और फसल की बढ़वार भी बढ़ाता है.
क्या है पंचगव्य और क्यों है खास?
पंचगव्य एक देसी जैविक खाद और पौधों का टॉनिक है. इसे पूरी तरह प्राकृतिक चीजों से बनाया जाता है. इसका छिड़काव करने से पौधे हरे-भरे रहते हैं, उनकी बढ़वार तेज होती है और रोग-कीट का असर कम होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाता. जमीन की उर्वरता बढ़ाता है और धीरे-धीरे खेत की सेहत सुधारता है. रासायनिक खाद की तुलना में यह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प माना जाता है. सब्जियों और अनाज दोनों में इसका अच्छा असर देखा गया है.
किन चीजों से बनता है पंचगव्य?
पंचगव्य पांच मुख्य देसी गौ-उत्पादों से बनता है. इसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी शामिल होते हैं. ये पांचों मिलकर पौधों के लिए जरूरी पोषण तैयार करते हैं. इसे और असरदार बनाने के लिए कुछ किसान इसमें गुड़ भी मिलाते हैं. गुड़ डालने से अच्छे सूक्ष्म जीव तेजी से बढ़ते हैं. केला और दलहन की कुट्टी मिलाने से फास्फोरस और पोटाश की मात्रा बढ़ती है. इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है और फसल मजबूत बनती है.
घर पर ऐसे बनाएं पंचगव्य
पंचगव्य बनाना मुश्किल नहीं है. इसके लिए
- 10 किलो गोबर
- 10 लीटर गोमूत्र
- 2 किलो दूध
- 2 किलो दही
- 1 किलो घी
इन सबको एक बड़े ड्रम या बर्तन में अच्छी तरह मिला लें. इस मिश्रण को 7 से 10 दिन तक छायादार जगह पर रखें. सुबह-शाम इसे लकड़ी से चलाना जरूरी है. कुछ दिन बाद बाकी सामग्री जैसे गुड़ या केला मिलाकर फिर से करीब 10 दिन तक चलाते रहें. बर्तन को कपड़े से ढककर छाया में रखें. तय समय के बाद पंचगव्य तैयार हो जाता है. इसमें हल्की खमीर जैसी खुशबू आती है, जो इसके तैयार होने का संकेत है.
फसल में कैसे करें सही उपयोग?
खड़ी फसल में छिड़काव के लिए 3 प्रतिशत घोल तैयार किया जाता है. यानी 3 लीटर पंचगव्य को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें. इससे पौधों की पत्तियां हरी रहती हैं और फूल-फल ज्यादा लगते हैं. बीज उपचार में भी यह बहुत काम आता है. बुवाई से पहले बीज को 3 प्रतिशत घोल में करीब 30 मिनट तक भिगोकर छाया में सुखा लें. इससे बीज जल्दी और ज्यादा अंकुरित होते हैं. नियमित उपयोग से मिट्टी की सेहत सुधरती है, कीटनाशक का खर्च घटता है और पैदावार बेहतर होती है.