बछड़े को जन्म लेते ही करें ये एक काम, गाय-भैंस रहेंगी स्वस्थ और दूध भी बढ़ेगा!
गाय-भैंस के बछड़े को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध पिलाना उसकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर विकास के लिए बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका प्लेसेंटा निकलने में भी मदद करता है, जिससे पशु स्वस्थ रहता है और दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है.
Animal Husbandry Tips: पशुपालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है. आधुनिक डेयरी फार्मिंग में अच्छी नस्ल, संतुलित आहार और साफ-सफाई के साथ नवजात बछड़ों की सही देखभाल भी बेहद जरूरी होती है. कई बार जानकारी के अभाव में पशुपालक जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां से अलग कर देते हैं, जिससे बछड़े और गाय-भैंस दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) जरूर पिलाना चाहिए. इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मां के शरीर से प्लेसेंटा (झाड़) भी प्राकृतिक रूप से जल्दी बाहर निकलने में मदद मिलती है.
जन्म के तुरंत बाद मां से अलग न करें बछड़ा
विशेषज्ञों के अनुसार कई पशुपालक यह मानते हैं कि प्लेसेंटा निकलने तक बछड़े को दूध नहीं पिलाना चाहिए, जबकि यह धारणा पूरी तरह गलत है. जन्म के तुरंत बाद बछड़े को मां के पास रहने देना और पहला दूध पिलाना बेहद जरूरी है. पहला दूध पोषक तत्वों, एंटीबॉडी और आवश्यक खनिजों से भरपूर होता है, जो नवजात बछड़े को शुरुआती संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है. यदि बछड़े को समय पर यह दूध नहीं मिलता तो उसके कमजोर होने और बार-बार बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.
प्राकृतिक तरीके से प्लेसेंटा निकलना ही बेहतर
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब बछड़ा मां का थन पकड़कर दूध पीता है तो शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है. यह हार्मोन गर्भाशय के संकुचन को तेज करता है, जिससे प्लेसेंटा प्राकृतिक रूप से बाहर निकलने में सहायता मिलती है. यदि प्लेसेंटा लंबे समय तक अंदर रह जाए तो पशु को संक्रमण, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए जल्दबाजी में किसी अनुभवहीन व्यक्ति से प्लेसेंटा निकलवाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
अनुभवहीन लोगों से इलाज कराना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेसेंटा न निकलने की स्थिति में कई पशुपालक स्थानीय अनुभवहीन लोगों की मदद लेते हैं, जो कई बार संक्रमण का कारण बन जाता है. गलत तरीके से प्लेसेंटा निकालने पर गर्भाशय में चोट, बैक्टीरियल संक्रमण और भविष्य में प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसका सीधा असर पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ता है. ऐसी स्थिति बनने पर केवल प्रशिक्षित पशु चिकित्सक की सलाह और उपचार ही लेना चाहिए.
प्रशिक्षण और सही जानकारी से होगा ज्यादा लाभ
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार पशुपालन शुरू करने से पहले बुनियादी प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है. सही जानकारी होने पर पशुपालक प्रसव के समय और उसके बाद की देखभाल बेहतर तरीके से कर सकते हैं. नवजात बछड़े को समय पर मां का पहला दूध पिलाना, साफ-सफाई बनाए रखना, पशु को संतुलित आहार देना और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना पशुपालन को लाभदायक बनाने की सबसे महत्वपूर्ण शर्तें हैं. थोड़ी-सी सावधानी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर पशुपालक बछड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं, पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता बनाए रख सकते हैं और भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बच सकते हैं.