गाय-भैंस में गर्भाशय बाहर आने पर न करें लापरवाही, जानें तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

सर्दी या प्रसव के बाद कई बार गाय-भैंसों में गर्भाशय शरीर से बाहर निकल आता है, जो बेहद खतरनाक स्थिति होती है. अगर समय पर इलाज न किया जाए तो जानवर की जान भी जा सकती है. ऐसे में सावधानी, साफ वातावरण और डॉक्टर की सलाह से इस समस्या से पूरी तरह बचा जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 31 Jul, 2026 | 09:07 PM

Animal Disease : गांव में या शहर के डेयरी फार्म में आपने अक्सर सुना होगा कि किसी गाय या भैंस का गर्भाशय बाहर निकल आया सुनने में आम लगता है, पर असल में यह एक गंभीर बीमारी है. अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो पशु को जानलेवा संक्रमण या मौत तक का खतरा हो सकता है. इस समस्या से बचाव और इलाज के आसान उपाय जानना हर पशुपालक के लिए जरूरी है.

क्या है यह समस्या और कब होती है

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गाय या भैंस  के प्रसव (डिलीवरी) के कुछ घंटे बाद कई बार गर्भाशय शरीर से बाहर निकल आता है. आमतौर पर यह 4 से 5 घंटे के अंदर होता है. इस स्थिति को गर्भाशय बाहर आना (Prolapse) कहा जाता है. यह तब ज्यादा होता है जब पशु ने कठिन प्रसव (कष्ट प्रसव) झेला हो या उसके शरीर में कैल्शियम की कमी हो. कई बार पशु के अत्यधिक जोर लगाने से गर्भाशय के साथ गुदा का हिस्सा भी बाहर आ जाता है, जिससे पशु को भारी तकलीफ होती है. अगर यह स्थिति लंबी देर तक बनी रहे, तो बाहर निकले अंग में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

क्यों होता है गर्भाशय बाहर निकलना

पशुओं में यह समस्या कई कारणों से हो सकती है-

इन सब वजहों से गर्भाशय  धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल आता है. अक्सर यह स्थिति प्रसव के तुरंत बाद होती है, जब शरीर कमजोर होता है और मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं.

क्या करें जब गर्भाशय बाहर निकल आए

अगर गाय या भैंस का गर्भाशय बाहर निकल आए तो सबसे पहले घबराएं नहीं. पशु को साफ, सुरक्षित और शांत जगह पर बांधें और बाकी पशुओं से अलग रखें. बाहर निकले गर्भाशय को साफ कपड़े या चादर से ढक दें ताकि धूल या कीड़े न लगें. अगर अंग पर मिट्टी या चोकर लगा हो तो ठंडे पानी से धीरे-धीरे धो लें. किसी भी तेज या जलन वाली दवा का उपयोग न करें. इसके बाद तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं, क्योंकि देरी से संक्रमण या रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर ही सुरक्षित तरीके से गर्भाशय को वापस अंदर डाल सकते हैं.

पशु को ठीक रखने के लिए आहार पर ध्यान दें

जिन पशुओं में कैल्शियम  की कमी होती है, उनमें गर्भाशय बाहर आने की समस्या जल्दी होती है. इससे बचाव के लिए उनके आहार में रोजाना 50 से 70 ग्राम कैल्शियम और मिनरल्स युक्त खनिज लवण मिश्रण (Mineral Mixture) जरूर मिलाएं. सूखे चारे की जगह हरा चारा, दलिया या चोकर मिला दाना खिलाना फायदेमंद रहता है. पशु को हमेशा साफ और ठंडा पानी दें, ताकि संक्रमण का खतरा  कम रहे. अगर पशु गर्भवती है, तो उसके भोजन में पोषक तत्वों का विशेष ध्यान रखें, ताकि प्रसव के समय कमजोरी न हो और मां व बच्चे दोनों सुरक्षित रहें.

बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है

गर्भाशय बाहर निकलना एक गंभीर समस्या है और अगर एक बार हो जाए, तो दोबारा होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए हर बार प्रसव के बाद पशु पर नजर रखना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम इंजेक्शन या सप्लीमेंट दें. पशु का वातावरण साफ, सूखा और गर्म रखें. प्रसव के तुरंत बाद भारी चारा या अधिक पानी न दें. जिन पशुओं में पहले यह समस्या हो चुकी है, उनमें अगली गर्भावस्था के  दौरान विशेष निगरानी रखें. समय पर सावधानी, सही खानपान और जागरूकता से इस परेशानी को पूरी तरह रोका जा सकता है. स्वस्थ पशु ही बेहतर उत्पादन की गारंटी देते हैं.

Published: 31 Jul, 2026 | 11:30 PM

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