पशु हो रहे कमजोर, पानी में मिलाकर दें ये 1 चीज.. गर्मी में भी बाल्टी भर दूध देंगी गाय-भैंस
Animal Husbandry Tips: भीषण गर्मी के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ रही है, जिससे उनकी सेहत और दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है. पानी और जरूरी लवण की कमी से पशु सुस्त हो जाते हैं और उनकी भूख घट जाती है. ऐसे में पशुपालकों को पर्याप्त साफ पानी, संतुलित आहार, छायादार और हवादार स्थान उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और उत्पादन पर असर न पड़े.
Dairy Farming Tips: अप्रैल के साथ ही गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगा है. तेज धूप और ऊंचे तापमान का प्रभाव अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है. खासकर दुधारू गाय और भैंसों में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
क्या है हीट स्ट्रेस और इसके लक्षण
पशु चिकित्सकों के अनुसार, जब तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो पशुओं के शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी होने लगती है. इस स्थिति को हीट स्ट्रेस कहा जाता है. इसके कारण पशु सुस्त हो जाते हैं, उनकी भूख कम हो जाती है और वे कम दूध देने लगते हैं. कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और पशु बीमार भी पड़ सकते हैं.
पानी और पोषण का रखें विशेष ध्यान
गर्मी के मौसम में पशुओं को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता होती है. यदि उन्हें पर्याप्त मात्रा में साफ और ठंडा पानी नहीं मिलता, तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि पशुओं को दिन में कई बार स्वच्छ पानी दिया जाए और उनके पानी के बर्तन हमेशा भरे रहें. इसके साथ ही चारे में मिनरल मिक्सचर और नमक की उचित मात्रा मिलाना चाहिए, ताकि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी न हो.
छाया और हवादार स्थान जरूरी
तेज धूप के समय पशुओं को खुले में बांधना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. दोपहर के समय तापमान सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इस दौरान पशुओं को छायादार और हवादार स्थान पर रखना जरूरी है. यदि शेड बना हुआ है, तो उसमें हवा के आने-जाने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. गांवों में पेड़ों की छांव या टिन शेड का भी उपयोग किया जा सकता है, लेकिन वहां भी वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है.
दूध उत्पादन पर पड़ता है सीधा असर
हीट स्ट्रेस का सबसे बड़ा असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. जब पशु असहज महसूस करते हैं, तो उनकी भूख कम हो जाती है और शरीर कमजोर होने लगता है. इससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. वहीं, अगर पशु स्वस्थ रहते हैं, तो उनका उत्पादन सामान्य बना रहता है और पशुपालकों की आमदनी पर कोई असर नहीं पड़ता.
समय पर देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है. पशुओं को पर्याप्त पानी, संतुलित आहार, छाया और स्वच्छ वातावरण देना बेहद जरूरी है. अगर इन बातों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो हीट स्ट्रेस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.