मछली पालन और विकास पर सरकार ने खर्च किए 20,750 करोड़, जानिए कहां-कहां खर्च हुआ पैसा
देश में मछली पालन को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने PMMSY के तहत 20,750 करोड़ रुपये निवेश किए हैं. फिश मार्केट, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट और परिवहन नेटवर्क से किसानों-मछुआरों की कमाई बढ़ रही है, जबकि समुद्री निर्यात 128 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है.
India Fisheries: देश में मछली पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार बड़े स्तर पर निवेश कर रही है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 20,750 करोड़ रुपये का कुल खर्च रखा गया है. इस राशि से मछली पकड़ने के बंदरगाह, मछली बाजार, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट, हैचरी और परिवहन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, इन योजनाओं से मछली उत्पादन के साथ किसानों और मछुआरों के लिए बाजार और निर्यात की सुविधाएं भी मजबूत हुई हैं.
6,018 मछली बिक्री केंद्रों से मजबूत हुआ मत्स्य कारोबार
PMMSY के तहत मत्स्य पालन से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है. इसके अलावा मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के जरिए भी पात्र संस्थाओं को कम ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है. सरकार के अनुसार, PMMSY और FIDF के तहत 184 मछली पकड़ने के बंदरगाह और मछली उतारने के केंद्र, 775 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट, 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयां, 6,018 मछली बिक्री केंद्र, 117 रिटेल और 24 थोक मछली बाजार स्वीकृत किए गए हैं. इसके अलावा मछली परिवहन के लिए 28,489 इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है. इनमें 13,718 आइस बॉक्स वाली मोटरसाइकिल, 8,527 आइस बॉक्स वाली साइकिल, 4,257 ऑटो रिक्शा, 1,577 इंसुलेटेड ट्रक और 410 रेफ्रिजरेटेड ट्रक शामिल हैं.
समुद्री उत्पादों का निर्यात 73,890 करोड़ रुपये पहुंचा
भारत का समुद्री खाद्य कारोबार भी लगातार विस्तार कर रहा है. बढ़ते शुल्क और बदलते वैश्विक व्यापार के बावजूद 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 19.72 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया. इसका कुल मूल्य 73,890 करोड़ रुपये यानी 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर रहा. सरकार के मुताबिक समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है. यह हिस्सेदारी 2013-14 में सिर्फ 2 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई. भारतीय समुद्री उत्पाद 128 से अधिक देशों में पहुंच रहे हैं. अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है, जिसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व का स्थान है.
मत्स्य क्षेत्र को नई रफ्तार
| मुख्य आंकड़ा | जानकारी |
|---|---|
| PMMSY परिव्यय | 20,750 करोड़ रुपये |
| कोल्ड स्टोरेज/आइस प्लांट | 775 |
| मछली कियोस्क | 6,018 |
| परिवहन इकाइयां | 28,489 |
| समुद्री निर्यात | 73,890 करोड़ रुपये |
| निर्यात मात्रा | 9.72 लाख टन |
| निर्यात बाजार | 128+ देश |
| मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां | 4,019 |
नए बाजार और हाई-वैल्यू मछलियों पर जोर
निर्यात बढ़ाने के लिए मत्स्य विभाग वाणिज्य विभाग, MPEDA और निर्यात निरीक्षण परिषद के साथ मिलकर कई स्तरों पर काम कर रहा है. भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) को लेकर जागरूकता कार्यक्रम, व्यापार प्रतिनिधिमंडल, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले, खरीदार-विक्रेता बैठकें और राष्ट्रीय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं. वहीं PMMSY के तहत सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, GIFT तिलापिया, ग्रूपर, पेनायस मोनोडॉन, स्कैम्पी और समुद्री शैवाल जैसी उच्च मूल्य वाली जलीय प्रजातियों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य नए निर्यात बाजार तैयार करना और भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है.
पशुधन क्षेत्र में भी बीमारी पर कसी लगाम
सरकार मत्स्य क्षेत्र के साथ पशुधन स्वास्थ्य पर भी बड़ा निवेश कर रही है. आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पशु रोगों FMD, ब्रुसेलोसिस, PPR और क्लासिकल स्वाइन फीवर की रोकथाम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है. अब तक FMD के 147.05 करोड़, ब्रुसेलोसिस के 3.19 करोड़, PPR के 6.74 करोड़ और क्लासिकल स्वाइन फीवर के 0.26 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं. लंपी स्किन डिजीज के लिए भी 34.62 करोड़ टीकाकरण हुआ है. किसानों के घर तक पशु चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के संचालन को वित्तीय सहायता दी जा रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पशुधन रोगों के प्रकोप की संख्या 2019 में 132 से घटकर 2025 में 40 रह गई है. यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी.