बारिश में गाय-भैंस पर मंडराया बड़ा खतरा! ये सूजन दिखते ही हो जाएं सावधान

मॉनसून में पशुओं के लिए लंगड़ी रोग बड़ा खतरा बन सकता है. कंधे, गर्दन या जांघ पर अचानक दर्दनाक सूजन, तेज बुखार और सुस्ती दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, समय पर पहचान और टीकाकरण बचाव में अहम हैं.

नोएडा | Published: 21 Aug, 2026 | 03:03 PM

Lumpy Leg Disease: बरसात का मौसम पशुपालकों के लिए सिर्फ चारे और पानी की चिंता नहीं लाता, बल्कि पशुओं में कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. इन्हीं में लंगड़ी रोग बेहद घातक माना जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, इस बीमारी में शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना बेहद जरूरी है, क्योंकि गंभीर मामलों में पशु की हालत तेजी से बिगड़ सकती है.

क्लोस्ट्रीडियम चौवोई से होती है बीमारी

लंगड़ी रोग  मुख्य रूप से क्लोस्ट्रीडियम चौवोई नामक जीवाणु से होता है. यह जीवाणु मिट्टी में पाया जाता है और दूषित चारे या पानी के जरिए पशुओं के शरीर में पहुंच सकता है. मानसून के दौरान नमी और गंदगी के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यह बीमारी विशेष रूप से 6 महीने से 4 साल तक की उम्र वाले पशुओं में अधिक देखने को मिलती है. गाय और भैंस के अलावा बकरी तथा भेड़ भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. इसलिए बरसात के दिनों में पशुपालकों को पशुओं की सेहत पर विशेष नजर रखनी चाहिए.

कंधे-जांघ पर सूजन दिखे तो तुरंत हों सतर्क

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, लंगड़ी रोग में पशु अचानक सुस्त पड़ सकता है. तेज बुखार के साथ खाना-पीना कम या बंद कर सकता है. बीमारी का प्रमुख संकेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अचानक दर्दनाक सूजन आना है. यह सूजन खासकर कंधे, गर्दन, जांघ और पुट्ठों पर दिखाई दे सकती है. प्रभावित हिस्से को छूने पर पशु को तेज दर्द  होता है. कई मामलों में सूजन वाली जगह को दबाने पर गैस के कारण चरचराहट जैसी आवाज महसूस हो सकती है. गंभीर स्थिति में त्वचा का रंग गहरा पड़ सकता है. कुछ मामलों में बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि पशु की मौत बहुत कम समय में हो सकती है.

लक्षण दिखें तो पशु को तुरंत अलग करें

अगर किसी पशु में लंगड़ी रोग के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए. पशुपालक बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराएं. बीमार पशु को संतुलित आहार देने पर भी ध्यान देना चाहिए. चिकित्सकीय सलाह के अनुसार लिवर टॉनिक और विटामिन-बी युक्त पोषण दिया जा सकता है. हालांकि, किसी भी दवा या उपचार को पशु चिकित्सक की सलाह के बिना शुरू नहीं करना चाहिए.

टीकाकरण ही सबसे मजबूत बचाव

लंगड़ी रोग के मामले में इलाज से ज्यादा जरूरी रोकथाम और टीकाकरण है. विशेषज्ञों के अनुसार, पशुओं का पहला टीकाकरण लगभग 4 से 6 महीने की उम्र में कराया जाना चाहिए और इसके बाद पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित टीकाकरण जारी रखना चाहिए. साथ ही पशुशाला की साफ-सफाई बनाए रखें और पशुओं को साफ पानी व सुरक्षित चारा दें. पशुओं में किसी भी तरह के घाव को खुला न छोड़ें. पशुशाला में संक्रमण नियंत्रण  के लिए पशु चिकित्सक या संबंधित विभाग की सलाह के अनुसार उचित कीटाणुनाशक का इस्तेमाल करें. मॉनसून में सतर्कता, स्वच्छता और समय पर टीकाकरण ही पशुओं को इस जानलेवा बीमारी से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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