शहद का कारोबार हुआ मालामाल! 10 साल में 88 फीसदी बढ़ा उत्पादन, किसानों के लिए खुला कमाई का रास्ता

Beekeeping in India: सरकार NBHM के जरिए वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. देश में शहद उत्पादन 2014-15 के 80,530 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन हो गया है. मिशन के तहत शहद जांच, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और अच्छी रानी मधुमक्खियों के लिए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं.

नोएडा | Updated On: 8 Aug, 2026 | 08:44 AM

National Beekeeping Mission: देश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM) के जरिए किसानों और मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसका फायदा सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोजगार, ग्रामीण आय और फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.

वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) के जरिए NBHM को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में चला रहा है. इसका मकसद मधुमक्खी पालन को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक और व्यवस्थित कारोबार बनाना है. सरकार किसानों और मधुमक्खी पालकों को बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है. खास तौर पर ग्रामीण परिवारों और महिलाओं को इससे जोड़कर अतिरिक्त कमाई का रास्ता तैयार करने की कोशिश की जा रही है.

शहद की जांच से लेकर पैकेजिंग तक सुविधाएं

मिशन के तहत शहद की क्वालिटी और बाजार में उसकी मांग बढ़ाने के लिए कई सुविधाएं तैयार की गई हैं. देश में अब तक 7 विश्वस्तरीय शहद परीक्षण प्रयोगशालाएं बनाई जा चुकी हैं. इसके अलावा मिलावट की जांच के लिए 66 छोटी प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं. शहद को बाजार तक पहुंचाने के लिए 83 प्रोसेसिंग इकाइयां और 90 संग्रहण, ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग इकाइयां तैयार की गई हैं. इससे मधुमक्खी पालकों को शहद की जांच, प्रोसेसिंग और बेहतर पैकेजिंग में मदद मिलेगी. इसका सीधा फायदा बाजार में बेहतर कीमत पाने में हो सकता है.

अच्छी रानी मधुमक्खियों पर भी फोकस

मधुमक्खी पालन से अच्छी कमाई के लिए स्वस्थ और मजबूत मधुमक्खी कॉलोनी होना बहुत जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अच्छी क्वालिटी की रानी मधुमक्खियों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए अब तक 81 केंद्रों को मदद दी जा चुकी है. इन केंद्रों में स्वस्थ और ज्यादा काम करने वाली रानी मधुमक्खियां तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है. इससे मजबूत मधुमक्खी कॉलोनियां तैयार होंगी और आगे चलकर शहद का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

10 साल में शहद उत्पादन में बड़ा उछाल

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि, देश में शहद उत्पादन तेजी से बढ़ा है. वर्ष 2014-15 में भारत में 80,530 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ था. यह आंकड़ा बढ़कर 2025-26 में 1,51,690 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. यानी करीब एक दशक में देश के शहद उत्पादन में लगभग 88 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह बढ़ोतरी बताती है कि मधुमक्खी पालन अब किसानों के लिए एक उपयोगी अतिरिक्त आय का साधन बनता जा रहा है.

सिर्फ शहद नहीं, खेती को भी फायदा

मधुमक्खी पालन का फायदा केवल शहद बेचने तक सीमित नहीं है. मधुमक्खियां फसलों में परागण की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाती हैं. इससे फल, सब्जियों और दूसरी बागवानी फसलों में उत्पादन और क्वालिटी बेहतर होने की संभावना रहती है. सरकार अब मधुमक्खी पालन को खेती के साथ जोड़कर किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई और रोजगार का साधन बनाने पर जोर दे रही है. इसके साथ ही मार्केटिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण, रिसर्च और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे आने वाले समय में मधुमक्खी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम जरिया बन सकता है.

Published: 8 Aug, 2026 | 08:41 AM

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