गर्मी में पशुओं की वॉटर फीडिंग टाइमिंग सही होना जरूरी, कहीं घट न जाए दूध और बीमार न हो जाए पशु
Summer Management: गर्मी में पशुओं को सही समय पर साफ और ताजा पानी देना बेहद जरूरी है. पानी की कमी से डिहाइड्रेशन, पेट की बीमारी और दूध कम होने जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं. विशेषज्ञ के अनुसार बार-बार थोड़ी मात्रा में पानी देने, छांव में रखने और चराई के बाद आराम देकर पानी पिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं.
Animal Care: गर्मी का मौसम आते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता होती है कि पशु बीमार न पड़ें और दूध भी कम न हो. अक्सर लोग चारा और दाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी की सही मात्रा और सही समय को नजरअंदाज कर देते हैं. यही छोटी गलती पशु की सेहत और दूध उत्पादन दोनों पर असर डालती है. KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (Kunwar Ghanshyam) के अनुसार, गर्मियों में पशु को सही समय पर साफ और ताजा पानी देना सबसे जरूरी काम है. अगर पानी की व्यवस्था सही रहे तो हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और पेट की बीमारी से काफी हद तक बचाव हो सकता है.
गर्मियों में पानी क्यों है सबसे जरूरी
गर्मी में पशु के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है. ऐसे में शरीर को ठंडा रखने के लिए उसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर पशु को समय पर पानी नहीं मिलता तो वह सुस्त हो जाता है, चारा कम खाता है और दूध भी घटने लगता है. कई बार शरीर में पानी की कमी होने से बुखार, सांस फूलना और कमजोरी जैसी दिक्कतें भी दिखने लगती हैं. कुंवर घनश्याम बताते हैं कि गाय, भैंस और दूसरे दुधारू पशुओं को गर्मी में सामान्य दिनों से ज्यादा पानी चाहिए. खासकर जो पशु दूध दे रहे हैं, उन्हें अधिक पानी देना जरूरी है क्योंकि दूध का बड़ा हिस्सा पानी से ही बनता है. इसलिए पानी की कमी सीधे दूध पर असर डालती है.
पशु को कब और कितना पानी पिलाना चाहिए
KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, एक बड़े दुधारू पशु को गर्मियों में कम से कम 30 लीटर पानी जरूर मिलना चाहिए. अगर पशु ज्यादा पीना चाहता है तो उसे रोकना नहीं चाहिए. कई पशु 40 से 60 लीटर तक भी पानी पी लेते हैं, जो पूरी तरह सामान्य है. पानी देने का सबसे अच्छा तरीका है कि दिन में एक या दो बार ज्यादा पानी देने की बजाय बार-बार थोड़ा-थोड़ा पानी दें. सुबह जल्दी, दोपहर की गर्मी से पहले, शाम और रात में पानी देना फायदेमंद रहता है. इससे पशु का शरीर हाइड्रेट रहता है. चराई या खेत से लौटने के तुरंत बाद पशु को बहुत ज्यादा पानी नहीं देना चाहिए. पहले उसे 10 से 15 मिनट छांव में आराम करने दें. उसके बाद धीरे-धीरे पानी पिलाएं. अचानक ज्यादा पानी देने से पेट फूलने, अपच या गैस की समस्या हो सकती है.
कैसा पानी दें ताकि बीमारी न हो
गर्मी में कई बार पानी की टंकी या बाल्टी धूप में रखी रहती है, जिससे पानी बहुत गर्म हो जाता है. ऐसा पानी पशु को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं बहुत ज्यादा ठंडा पानी भी सही नहीं है. इससे पाचन खराब हो सकता है. कुंवर घनश्याम के अनुसार, पशु को हमेशा साफ, ताजा और हल्का ठंडा पानी देना चाहिए. पानी न ज्यादा गर्म हो और न बहुत ठंडा. कोशिश करें कि पानी की बाल्टी, टब या टंकी हमेशा छांव में रखी हो ताकि पानी लंबे समय तक पीने लायक रहे. अगर पशु कम पानी पी रहा है तो उसके दाने या चारे में थोड़ा नमक मिलाया जा सकता है. इससे उसे प्यास ज्यादा लगती है और वह पानी अच्छी मात्रा में पीता है. इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और गर्मी का असर कम पड़ता है.
इन आसान बातों से दूध और सेहत दोनों रहेंगे बेहतर
गर्मी में सिर्फ पानी ही नहीं, पशु को ठंडी तासीर वाला हरा चारा भी देना चाहिए. जैसे बरसीम, हरा मक्का या हरा चारा उपलब्ध हो तो जरूर दें. इससे शरीर को ठंडक मिलती है. पशु को दिन में तेज धूप में बांधने की बजाय छांव, पंखा या कूलर जैसी व्यवस्था भी करनी चाहिए. पानी की सही व्यवस्था से पशु ज्यादा चारा खाता है, शरीर ठंडा रहता है और दूध में गिरावट कम होती है. यही वजह है कि सफल पशुपालक गर्मियों में पानी पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं. अगर आप पशुपालन को व्यवसाय बना रहे हैं, तो याद रखें कि गर्मियों में पानी ही पशु की सबसे बड़ी दवा है. सही समय, सही मात्रा और सही तापमान का पानी देने से आपका पशु स्वस्थ रहेगा, दूध भी अच्छा देगा और इलाज का खर्च भी बचेगा.