Dairy Farming Tips: अप्रैल महीने के आगमन के साथ ही गर्मी अपने पूरे प्रभाव में नजर आने लगती है. यह सिर्फ मनुष्यों पर ही नहीं बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती है. पशु विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मवेशियों में डिहाइड्रेशन, मस्टाइटिस, अपच और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं. अगर किसान इस दौरान पशुओं के खानपान और पोषण पर ध्यान नहीं देंगे, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. सौभाग्य से, गर्मी में कुछ विशेष हरी घासें ऐसी होती हैं, जो पशुओं को मौसमी बीमारियों से बचाने में बेहद फायदेमंद साबित होती हैं.
पशुओं के लिए अमृत समान हरी घास
KVK के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गर्मी के मौसम में मवेशियों को ज्वार, नेपियर, बाजरा, लोबिया और मक्का जैसी हरी घास खिलाना अत्यंत लाभकारी है. इन घासों में भरपूर नमी और पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मवेशियों को डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाते हैं. किसान अप्रैल के महीने में इन फसलों की खेती कर सकते हैं और गर्मी के पूरे मौसम में अपने पशुओं को पौष्टिक चारा उपलब्ध करवा सकते हैं.
नेपियर घास की खासियत
नेपियर घास को सामान्यतः फरवरी-मार्च या जुलाई-अगस्त में बोया जाता है, लेकिन अप्रैल में भी इसकी खेती संभव है. इसके लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है. रोपाई के लगभग तीन महीने बाद यह कटाई के लिए तैयार हो जाती है. नेपियर घास में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं.
ज्वार का पौष्टिक महत्व
ज्वार एक ऐसी फसल है जिसे अप्रैल में भी उगाया जा सकता है. यह मुख्य रूप से खरीफ फसल मानी जाती है, लेकिन रबी और जायद मौसम में भी इसकी खेती संभव है. ज्वार में फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. यही कारण है कि यह दुधारू पशुओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है.
लोबिया भी है फायदेमंद विकल्प
लोबिया की खेती भी अप्रैल में आसानी से की जा सकती है. यह फसल 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. लोबिया में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, विटामिन B1, B9, C, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे उगाने के लिए बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी की आवश्यकता होती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है. हरी घास के साथ-साथ पशुओं को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना और उनके आवास की साफ-सफाई बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.