मौसम की मार से तबाह हुई बिहार की शाही लीची, मुजफ्फरपुर के बागानों में 70 फीसदी तक घटा उत्पादन

नवंबर और दिसंबर 2025 में पर्याप्त ठंड नहीं पड़ने से लीची के पेड़ों पर फूल कम आए. सामान्य ठंड के बजाय तापमान ज्यादा रहने से कई पेड़ों में फूलों की जगह नई पत्तियां निकल आईं. इसके बाद फरवरी और मार्च में मौसम लगातार बदलता रहा. बादल छाने और बेमौसम बारिश की वजह से फूलों पर ‘फ्लावर वेबर’ नामक कीट का हमला बढ़ गया.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 May, 2026 | 01:36 PM

Bihar litchi crop loss: बिहार की मशहूर शाही लीची इस बार मौसम की बेरुखी का शिकार हो गई है. मुजफ्फरपुर, वैशाली और पश्चिम चंपारण जैसे बड़े लीची उत्पादक जिलों में किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. किसानों और वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सीजन में कई बागानों में उत्पादन 50 से 70 प्रतिशत तक घट गया है.

राज्य में बदलते मौसम, समय से पहले गर्मी, लगातार बारिश और कीटों के हमले ने लीची की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है. इसका असर अब किसानों की आमदनी पर भी साफ दिखाई देने लगा है.

मुजफ्फरपुर के बागानों में कम दिख रही लीची

मुजफ्फरपुर को देश में लीची की राजधानी कहा जाता है. यहां करीब 12 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती होती है. लेकिन इस बार बागानों में पेड़ों पर सामान्य वर्षों जैसी लाल और गुलाबी लीची नजर नहीं आ रही.

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार बिहार लीची एसोसिएशन के अध्यक्ष बच्चा सिंह ने बताया कि कई बागानों में इस बार सिर्फ 30 प्रतिशत तक ही उत्पादन हो रहा है. किसान भारी आर्थिक नुकसान की चिंता में हैं.

मौसम ने बिगाड़ा पूरा चक्र

नवंबर और दिसंबर 2025 में पर्याप्त ठंड नहीं पड़ने से लीची के पेड़ों पर फूल कम आए. सामान्य ठंड के बजाय तापमान ज्यादा रहने से कई पेड़ों में फूलों की जगह नई पत्तियां निकल आईं. इसके बाद फरवरी और मार्च में मौसम लगातार बदलता रहा. बादल छाने और बेमौसम बारिश की वजह से फूलों पर ‘फ्लावर वेबर’ नामक कीट का हमला बढ़ गया. इससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई और बड़ी मात्रा में फसल खराब हो गई.

अप्रैल की गर्मी ने बढ़ाई परेशानी

वैज्ञानिकों का कहना है कि अप्रैल में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने के कारण पेड़ों से कच्चे फल तेजी से गिरने लगे. तेज गर्मी और आंधी ने भी लीची को नुकसान पहुंचाया. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि लीची तापमान, नमी और बारिश के प्रति बेहद संवेदनशील फल है. जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ वर्षों से इसकी खेती पर लगातार असर पड़ रहा है.

किसानों की बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, कई किसानों का कहना है कि पहले जहां बड़े बागानों से 25 हजार तक लीची के बॉक्स निकलते थे, वहीं इस बार उत्पादन घटकर 7 से 8 हजार बॉक्स तक रह गया है. लगातार बढ़ती लागत और घटती पैदावार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. उन्हें डर है कि अगर मौसम का यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में लीची की खेती और ज्यादा प्रभावित हो सकती है.

बाजार पर भी पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन कम होने से बाजार में लीची की कीमतें बढ़ सकती हैं. बिहार की शाही लीची देश ही नहीं, विदेशों में भी काफी पसंद की जाती है. ऐसे में उत्पादन में गिरावट का असर व्यापार और निर्यात पर भी पड़ सकता है. कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को बदलते मौसम के अनुसार नई तकनीक अपनाने और फसलों की सुरक्षा के उपायों पर जोर दे रहे हैं.

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