लीची की फसल पर मंडरा रहा बड़ा खतरा! किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, जल्द करें ये काम

Litchi Farming Tips: लीची की फसल पर इस समय फल बेधक कीटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उत्पादन और क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र ने किसानों को समय पर कीटनाशकों और बोरॉन के छिड़काव की सलाह दी है, ताकि फलों को नुकसान से बचाया जा सके. तुड़ाई से 10-12 दिन पहले अंतिम स्प्रे करना भी जरूरी बताया गया है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 16 May, 2026 | 09:00 PM

Litchi Pest Control Tips: लीची की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा जरिया मानी जाती है, खासकर बिहार जैसे राज्यों में जहां इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन इस समय लीची के बागानों पर फल बेधक कीटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. अगर किसान सही समय पर सावधानी नहीं बरतते, तो मेहनत से तैयार हुई पूरी फसल खराब हो सकती है. मौजूदा मौसम लीची के फल बनने के लिए जितना अनुकूल है, उतना ही कीटों और बीमारियों के फैलने के लिए भी खतरनाक माना जाता है.

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की ओर से जारी एडवाइजरी में किसानों को समय रहते वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और उत्पादन बेहतर बनाया जा सके.

फल बेधक कीट से सबसे ज्यादा खतरा

इस समय लीची की शाही किस्म में फल बेधक कीट का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. यह कीट सीधे फलों पर हमला करता है और धीरे-धीरे उन्हें अंदर से खराब कर देता है. इसके कारण फलों की गुणवत्ता गिर जाती है और बाजार में सही कीमत नहीं मिल पाती. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती चरण में ही कीट नियंत्रण नहीं किया गया, तो नुकसान तेजी से बढ़ सकता है. इसलिए किसानों को नियमित रूप से बाग की निगरानी करनी चाहिए और संक्रमित फलों को तुरंत अलग करना चाहिए.

समय पर करें सही दवा का छिड़काव

फल बेधक कीट को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ प्रभावी दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी है.

  • थियाक्लोप्रिड 0.6 मिली प्रति लीटर प्लस लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 0.6 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर
  • नोवेल्यूरॉन 5.25 फीसदी प्लस इंडोक्साकार्ब 4.5 फीसदी SC 1.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें

ये दवाएं कीटों को नियंत्रित कर फसल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं.

इसके अलावा नोवेल्यूरॉन और इंडोक्साकार्ब आधारित दवाएं भी कीट नियंत्रण में काफी कारगर मानी जाती हैं.

बोरॉन बढ़ाएगा फल की क्वालिटी

लीची के अच्छे विकास और बेहतर क्वालिटी के लिए बोरॉन बेहद जरूरी पोषक तत्व माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय घुलनशील बोरॉन का छिड़काव करने से फलों का आकार बेहतर होता है और उनमें चमक भी बढ़ती है. इतना ही नहीं, बोरॉन फल गिरने की समस्या को भी काफी हद तक कम करता है. किसान चाहें तो इसे कीटनाशक के साथ मिलाकर भी छिड़काव कर सकते हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है.

तुड़ाई से पहले जरूर करें अंतिम स्प्रे

विशेषज्ञों का कहना है कि लीची की तुड़ाई से करीब 10 से 12 दिन पहले अंतिम छिड़काव जरूर करना चाहिए. यह स्प्रे फसल को आखिरी समय तक फल बेधक कीटों से सुरक्षित रखने में मदद करता है.

इसके लिए किसान इन विकल्पों में से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं:

  • इमामेक्टिन बेंजोएट 5 फीसदी SG 0.8 ग्राम प्रति लीटर पानी
  • स्पाइनोसैड 45 फीसदी SC 1.6 मिली प्रति 5 लीटर पानी
  • स्पिनेटोरम 11.7 फीसदी SC 1.0 मिली प्रति लीटर पानी

सही मात्रा में इनका उपयोग करने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.

बेहतर परिणाम पाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करना चाहिए, ताकि दवा का असर ज्यादा हो. बाग में हल्की सिंचाई बनाए रखना भी जरूरी है, जिससे पौधों में नमी बनी रहे.

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Published: 16 May, 2026 | 09:00 PM
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