बाघ-तेंदुआ के हमलों में 104 ग्रामीणों की मौत, तेंदू पत्ता महिला किसानों पर सबसे ज्यादा अटैक

HUman Animal Clash: जंगली जानवरों के हमलों में ग्रामीणों की मौत के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं. महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक पिछले 5 साल में राज्य में जंगली जानवरों के हमलों में 420 लोगों की मौत हुई, जिनमें बाघ और तेंदुए के हमलों से 104 लोगों की जान गई.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 22 May, 2026 | 01:16 PM

महाराष्ट्र समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में पशु मानव टकरा के मामले बढ़ते जा रहे हैं. अकेले महाराष्ट्र में बीते 5 साल में बाघ और तेंदुआ समेत अन्य जंगली जानवरों के हमलों में 420 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि, सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हो चुके हैं. ताजा मामला महाराष्ट्र के चंद्रपुर इलाके का है, जहां तेंदू पत्ता इकट्ठा करने गई 4 महिलाओं को बाघ ने हमला कर मार डाला.

जंगली जानवरों के हमले सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में

महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक पिछले 5 साल में राज्य में जंगली जानवरों के हमलों में 420 लोगों की मौत हुई, जिनमें बाघ और तेंदुए के हमलों से 104 लोगों की जान गई. इसके अलावा केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2022 के बीच सिर्फ बाघ के हमलों में महाराष्ट्र में 170 लोगों की मौत हुई थी, जो देश में सबसे ज्यादा थी. वहीं, हाल के वर्षों में तेंदुआ हमलों के मामले भी तेजी से बढ़े हैं, खासकर पुणे, नासिक और जुन्नर क्षेत्र में.

चंद्रपुर में तेंदू पत्ते जमा कर रही 4 महिलाओं को बाघ ने मार डाला

चंद्रपुर इलाके के एक वन अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में तेंदू के पत्ते जमा कर रही चार महिलाओं को एक बाघ ने हमला करके मार डाला. अधिकारी ने बताया कि यह घटना सिंदेवाही तहसील के गुंजेवाही गांव के पास हुई, जो जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है. अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं का एक समूह तेंदू के पत्ते जमा करने के लिए जंगल के एक हिस्से में गया था. इन पत्तों का इस्तेमाल मुख्य रूप से ‘बीड़ी’ (हाथ से बनाई जाने वाली सिगरेट) के लिए प्राकृतिक रैपर के तौर पर किया जाता है. जब वे पत्ते जमा करने में व्यस्त थीं, तभी एक बाघ ने उनमें से चार को मार डाला.

महिला किसानों की मौत पर जांच शुरू, मुआवजे की मांग

मृतक महिलाओं की पहचान कवाडाबाई मोहुरले (45), अनीताबाई मोहुरले (40), सुनीता मोहुरले (38) और संगीता चौधरी (50) के रूप में हुई है. ये सभी गुंजेवाही की रहने वाली थीं. यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि बाघ ने सभी महिलाओं को एक ही जगह और एक ही समय पर मारा या अलग-अलग जगहों पर. मुख्य वन संरक्षक (चंद्रपुर सर्कल) आरएम रामानुजन ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वन अधिकारियों की एक टीम उस इलाके में पहुंची. उन्होंने कहा कि ‘पंचनामा’ के बाद और ज्यादा जानकारी सामने आएगी. वहीं, मृतकों को मुआवजे देने की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही है.

जंगली जानवर और मानव टकराव का कारण और बचाव का तरीका

जानकार कहते हैं कि जंगली जानवरों और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव मुख्य रूप से जंगलों की कटाई, तेजी से बढ़ते शहरीकरण, खेती के विस्तार और वन क्षेत्रों में मानव दखल के कारण हो रहा है. भोजन और पानी की तलाश में बाघ, तेंदुए, हाथी जैसे जानवर आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे हादसे बढ़ते हैं. इससे बचाव के लिए जंगलों और वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना, गांवों के आसपास निगरानी बढ़ाना, रात में सतर्कता बरतना, कचरा और पशुओं को खुले में न छोड़ना तथा लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है. सरकार और स्थानीय समुदाय मिलकर काम करें तो मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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