गेहूं खरीद में 69 प्रतिशत तक गिरावट! आखिर क्यों मंडियों तक नहीं पहुंच रही फसल? जानिए वजह

इस बार गेहूं की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा असर बेमौसम बारिश का पड़ा है. मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश ने फसल की चमक (लस्टर) और दाने की गुणवत्ता को खराब कर दिया. मंडियों में आने वाले गेहूं में करीब 20 प्रतिशत तक दाने सिकुड़े और टूटे हुए पाए जा रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Apr, 2026 | 09:00 AM

wheat procurement: देश में गेहूं खरीद का सीजन शुरू होते ही इस बार एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है. जहां हर साल शुरुआती दिनों में तेजी से खरीद होती है, वहीं इस बार सरकारी खरीद में भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन के पहले पखवाड़े में गेहूं की खरीद लगभग 69 प्रतिशत तक गिर गई है, जिससे किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई है.

खरीद में बड़ी गिरावट के आंकड़े

भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से शुरू हुए खरीद अभियान में अब तक सिर्फ 1.53 मिलियन टन गेहूं ही खरीदा गया है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 5 मिलियन टन था.

हालांकि मंडियों में कुल आवक 3.5 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है, लेकिन गुणवत्ता की समस्या के कारण बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा नहीं जा पा रहा है. पिछले साल इसी समय मंडियों में 9.3 मिलियन टन गेहूं आया था, जिससे साफ है कि इस बार आवक भी कम है और खरीद भी धीमी है.

बेमौसम बारिश ने बिगाड़ी गुणवत्ता

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार गेहूं की गुणवत्ता पर सबसे ज्यादा असर बेमौसम बारिश का पड़ा है. मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश ने फसल की चमक (लस्टर) और दाने की गुणवत्ता को खराब कर दिया.

मंडियों में आने वाले गेहूं में करीब 20 प्रतिशत तक दाने सिकुड़े (श्रिवेल्ड) और टूटे हुए पाए जा रहे हैं, जबकि FCI केवल 6 प्रतिशत तक ही ऐसे दानों को स्वीकार करता है. यही वजह है कि बड़ी मात्रा में गेहूं खरीद के मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है.

पंजाब में बढ़ा विरोध, रेल रोकने की चेतावनी

खरीद में देरी और गुणवत्ता के सख्त मानकों के चलते पंजाब के किसान परेशान हो गए हैं. कई किसान दिनों तक मंडियों में अपनी फसल लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही.

इसी के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा जैसे संगठनों ने 17 अप्रैल को पंजाब में चार घंटे के लिए रेल रोको आंदोलन का ऐलान किया है. उनकी मांग है कि सरकार गेहूं की गुणवत्ता के नियमों में ढील दे, ताकि किसानों की फसल खरीदी जा सके.

सरकार और एजेंसियों की दुविधा

पंजाब सरकार भी इस स्थिति को लेकर असमंजस में है. पंजाब आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम गोयल के अनुसार, राज्य सरकार बड़े पैमाने पर खरीद करने से इसलिए हिचक रही है क्योंकि अगर बाद में FCI खराब गुणवत्ता के गेहूं को अस्वीकार कर देता है, तो राज्य के पास बड़ी मात्रा में अनबिका स्टॉक फंस सकता है.

इसी बीच, केंद्र सरकार की एक टीम पंजाब की मंडियों का दौरा कर रही है और गेहूं के सैंपल लेकर जांच कर रही है. आने वाले कुछ दिनों में इस पर फैसला लिया जा सकता है.

हरियाणा ने दी राहत, नियमों में ढील

जहां पंजाब में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, वहीं हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत देते हुए गुणवत्ता मानकों में ढील दे दी है. हरियाणा में अब 15 प्रतिशत तक टूटे और सिकुड़े दानों वाला गेहूं खरीदा जा रहा है, जबकि पहले यह सीमा 6 प्रतिशत थी. इसके अलावा 70 प्रतिशत तक लस्टर लॉस वाले गेहूं को भी स्वीकार किया जा रहा है. इससे किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है.

लक्ष्य और आगे की चुनौती

सरकार ने इस सीजन में 30 मिलियन टन से ज्यादा गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है.

गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल पर की जा रही है, लेकिन अगर गुणवत्ता की समस्या बनी रहती है, तो खरीद की रफ्तार धीमी ही रह सकती है.

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Published: 16 Apr, 2026 | 09:00 AM
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