38 फीसदी कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन! खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखने लगा कमजोर मानसून का असर
Monsoon 2026: इस साल मानसून की शुरुआत धीमी रही है और जून के मध्य तक देश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश हुई है. इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिख रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले कम हुई है. दलहन और कपास की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है.
Kharif Crops: देश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है. जून के मध्य तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसका असर खेती-किसानी पर दिखाई देने लगा है. खासकर खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, अच्छी बात यह है कि कई जलाशयों में अभी पर्याप्त पानी मौजूद है, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है.
बारिश में बड़ी कमी, खेती पर असर शुरू
भारत में खेती के लिए मानसून को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने से कई राज्यों में खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है. इसका असर खेती-किसानी पर साफ दिखाई देने लगा है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून तक देश में सिर्फ 46.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस समय तक सामान्य तौर पर 74.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. यानी देशभर में करीब 38 फीसदी कम वर्षा हुई है.
वहीं, पिछले एक सप्ताह के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. इस दौरान सामान्य से लगभग 48 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. कम बारिश के कारण कई इलाकों में खेतों में नमी की कमी हो गई है, जिससे किसान बुवाई शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं.
देश के अधिकांश हिस्सों में कमजोर मानसून
कम बारिश की समस्या सिर्फ कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देश के 36 मौसम विज्ञान उपमंडलों में से 22 क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई है. जिला स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है. करीब 66 फीसदी इलाकों में बारिश सामान्य से कम या जरूरत के मुकाबले काफी कम रही है. सबसे ज्यादा असर मध्य भारत में देखा गया है, जहां सामान्य से 62 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, पूर्वी भारत में भी बारिश में करीब 44 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. अगर आने वाले दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ, तो खेती की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
खरीफ फसलों की बुवाई हुई प्रभावित
कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है. जून के दूसरे सप्ताह तक देश में करीब 84.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 3.9 फीसदी कम है. अगर जल्द ही बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो बुवाई का क्षेत्र और घट सकता है. इसका असर फसलों के उत्पादन पर भी पड़ सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
दलहन और कपास किसानों के लिए बढ़ी मुश्किल
फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कम बारिश का सबसे ज्यादा असर दलहन और कपास की खेती पर पड़ा है. पिछले साल की तुलना में दलहन की बुवाई का क्षेत्र 43.2 फीसदी घट गया है, जबकि कपास की बुवाई में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई है.
हालांकि, धान की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है. इस बार धान की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले 28.4 फीसदी बढ़ा है. कई इलाकों में किसानों ने मौसम और पानी की उपलब्धता को देखते हुए फसलों का चयन बदला है, जिसके कारण धान की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
जलाशयों में पर्याप्त पानी से मिली राहत
बारिश की कमी के बीच एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है. देश के प्रमुख जलाशयों में फिलहाल पर्याप्त पानी उपलब्ध है. जून के दूसरे सप्ताह तक जलाशयों में जल स्तर कुल क्षमता का 28.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो पिछले दस सालों के औसत से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है. इस अतिरिक्त जल भंडारण से सिंचाई व्यवस्था को सहारा मिल सकता है और उन क्षेत्रों के किसानों को राहत मिल सकती है जहां बारिश कम हुई है.
जुलाई और अगस्त पर टिकी किसानों की उम्मीद
मानसून का असली असर जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश से तय होगा. ये दोनों महीने देश में सबसे ज्यादा बारिश वाले माने जाते हैं और खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार काफी हद तक इन्हीं पर निर्भर करती है.
अगर आने वाले हफ्तों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होती है, तो खेती की स्थिति में सुधार आ सकता है और किसानों को राहत मिल सकती है. लेकिन अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है. साथ ही खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका भी रहेगी.