अनानास की खेती से किसान की बदली किस्मत, महज 2 एकड़ जमीन से हो रही लाखों की कमाई

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के किसान अरुण कुमार सॉ ने अनानास की खेती से सफलता की नई मिसाल पेश की है. दो एकड़ में अनानास उगाकर वह सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं. उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के किसान भी बागवानी और बहुफसली खेती अपना रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Jun, 2026 | 08:36 AM

Success Story: छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले जंगल और धान की खेती की तस्वीर उभरती है. आमतौर पर लोगों को लगता है कि राज्य में किसान केवल धान की ही खेती करते हैं, लेकिन ऐसी बात नहीं है. यहां किसान वैज्ञानिक तरीके से बागवानी फसलों की खेती भी कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है. राज्य में ऐसे सैकड़ों किसान हैं, जिनकी किस्मत बागवानी ने बदल दी है. आज हम रायगढ़ जिले के सकरबोगा पंचायत स्थित साल्हेओना गांव के एक ऐसे किसान की कहानी बता रहे हैं, जो अनानास की खेती से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. इस किसान का नाम अरुण कुमार सॉ है. उनकी सफलता ने उन्हें क्षेत्र के युवाओं के लिए एक आदर्श किसान बना दिया है. आसपास के युवा किसान उनसे खेती की नई तकनीकें और बारीकियां सीख रहे हैं.

दरअसल, प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ ने कभी शौक के तौर पर खेत की मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए थे, लेकिन यही शौक आज उनकी अतिरिक्त कमाई का बड़ा जरिया बन गया है. वर्तमान में अरुण कुमार सॉ करीब दो एकड़ क्षेत्र में अनानास की खेती  कर रहे हैं और इससे सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. कृषि विशेषज्ञ उनकी खेती को नवाचार और फसल विविधीकरण का सफल उदाहरण मान रहे हैं.

धान की खेती से अनानास तक का सफर

अरुण कुमार सॉ पहले धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. कई साल पहले उन्होंने घर के उपयोग के लिए खेत की मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए थे. पौधों की अच्छी वृद्धि और फलों की बेहतर गुणवत्ता देखकर उन्होंने अनानास की खेती को बड़े स्तर पर अपनाने का फैसला किया. पौधों से निकलने वाले नए प्ररोहों को अलग कर दोबारा लगाने से उनकी खेती का दायरा लगातार बढ़ता गया. इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने भी उन्हें काफी मदद की. धीरे-धीरे उनका यह छोटा प्रयोग दो एकड़ के अनानास बगीचे में बदल गया. आज उनके खेत में आम और अमरूद के पेड़ों के बीच कतारों में लगे अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल मॉडल बन चुके हैं.

खाद और कीटनाशकों की कम है जरूरत

अनानास की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत है. इस फसल में खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत अपेक्षाकृत कम पड़ती है, जिससे किसानों का खर्च भी कम रहता है. वहीं बाजार में अनानास की मांग सालभर बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल जाती है. अरुण कुमार सॉ के अनुसार, उनके खेत में तैयार होने वाले अनानास की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण एक फल 40 से 80 रुपये तक बिक जाता है. इससे उन्हें खेती से बेहतर मुनाफा हासिल हो रहा है.

अब हो रही अच्छी कमाई

अनानास के फलों के अलावा पौधों से निकलने वाले नए प्ररोहों (पौध) की बिक्री भी अरुण कुमार सॉ की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गई है. उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी और उद्यानिकी फसलों की खेती  की ओर रुख कर रहे हैं. इससे क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है. अरुण कुमार सॉ का कहना है कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि सही फसल का चयन, नई तकनीकों का उपयोग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन भी जरूरी है. उनका मानना है कि यदि किसान स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल चुनें, तो कम जमीन और सीमित संसाधनों में भी अच्छी आय हासिल की जा सकती है.

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Published: 28 Jun, 2026 | 08:35 AM