इथेनॉल बनाने में अनाज का रिकॉर्ड इस्तेमाल, गन्ना का यूज तेजी से घटा.. क्या कहते हैं आंकड़े

इथेनॉल बनाने में मक्का समेत अन्य अनाज के इस्तेमाल बढ़ने का सकारात्मक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की बात ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने कही है. मक्का और अन्य अनाजों की मांग बढ़ने से इन फसलों के लिए बाजार का एक अतिरिक्त सोर्स तैयार होता है.

नोएडा | Updated On: 12 Aug, 2026 | 02:36 PM

भारत में इथेनॉल की आपूर्ति 800 करोड़ लीटर के आंकड़े को पार कर गई है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के मुताबिक जुलाई 2026 में देश में कुल 93 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. इसमें अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी यानी 71 करोड़ लीटर रही. जून में अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 73 फीसदी थी. यानी कुल मासिक आपूर्ति घटने के बावजूद अनाज से बनने वाले इथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ी है.

इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का और खाद्यान्न का इस्तेमाल बढ़ा

जुलाई में अनाज आधारित इथेनॉल के उत्पादन में मक्का और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त अनाज सबसे बड़े स्रोत रहे. दोनों से 30-30 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. इसके अलावा खराब या क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से करीब 11 करोड़ लीटर इथेनॉल मिला. इसका मतलब है कि इथेनॉल उत्पादन में अब मक्का और दूसरे अनाजों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है. इससे किसानों के लिए मक्का जैसे अनाजों की मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है, हालांकि खाद्यान्न की कीमतों और उपलब्धता पर इसका असर बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.

गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया घटी

दूसरी ओर गन्ने पर आधारित इथेनॉल की आपूर्ति जुलाई में घटकर 22 करोड़ लीटर रह गई, जबकि जून में यह करीब 28 करोड़ लीटर थी. जुलाई में कुल इथेनॉल आपूर्ति में गन्ने से बने इथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 24 फीसदी रही है. इसमें बी-हेवी शीरा से 17 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 4 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरा से 1 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई. इससे साफ है कि फिलहाल इथेनॉल कार्यक्रम में अनाज आधारित फीडस्टॉक का महत्व गन्ने के मुकाबले बढ़ रहा है.

मक्का और अन्य अनाजों के लिए किसानों को मिला नया बाजार

इस बदलाव का कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. इथेनॉल के लिए मक्का और अन्य अनाजों की मांग बढ़ने से इन फसलों के लिए बाजार का एक अतिरिक्त सोर्स तैयार होता है. वहीं, FCI के अतिरिक्त खाद्यान्न का इस्तेमाल इथेनॉल में होने से सरकारी भंडार में रखे अतिरिक्त अनाज के उपयोग का रास्ता मिलता है. हालांकि, बड़े पैमाने पर अनाज को इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने से खाद्य और पशुचारा क्षेत्र के लिए उपलब्धता तथा कीमतों पर नजर रखना भी जरूरी होगा.

इथेनॉल उत्पादन के आंकड़े.

इथेनॉल उत्पादन की मजबूत क्षमता तैयार, अब मांग पैदा करना जरूरी

AIDA का कहना है कि भारत ने इथेनॉल उत्पादन की मजबूत क्षमता तैयार कर ली है और अब अगली चुनौती इस क्षमता के लिए पर्याप्त मांग पैदा करने की है. संस्था ने अधिक इथेनॉल मिश्रण, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और इथेनॉल के दूसरे उपयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है. कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारत का इथेनॉल कार्यक्रम अब गन्ना आधारित मॉडल से आगे बढ़कर अनाज, खासकर मक्का आधारित उत्पादन की ओर तेजी से विविध हो रहा है.

मासिक सप्लाई मिक्स में बदलाव अहम

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) की डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी ने कहा कि 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार करना भारत के इथेनॉल प्रोग्राम के लिए एक अहम उपलब्धि है. उतनी ही अहम बात मासिक सप्लाई मिक्स में बदलाव है. अनाज से बने इथेनॉल की हिस्सेदारी जून में लगभग 73% से बढ़कर जुलाई में 76% हो गई, जिसमें मक्का और FCI के अतिरिक्त अनाज, दोनों का योगदान 30-30 करोड़ लीटर रहा. सप्लाई पक्ष ने कई तरह के फीडस्टॉक और बढ़ते प्रोडक्शन बेस के जरिए प्रतिक्रिया देने की अपनी क्षमता दिखाई है.

Published: 12 Aug, 2026 | 01:49 PM

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