Akshaya Tritiya 2026: 19 या 20 अप्रैल कब है अक्षय तृतीया, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया के दिन नकारात्मक सोच और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहना चाहिए. इस पावन अवसर पर किसी का अपमान या अनादर करना अशुभ माना जाता है. पूजा के दौरान पूरी शुद्धता, श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखना जरूरी होता है, ताकि इस शुभ दिन का पूरा फल और सौभाग्य प्राप्त हो सके.

नोएडा | Updated On: 14 Apr, 2026 | 08:46 PM

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया के दिन नकारात्मक सोच और किसी भी तरह के विवाद से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना शुभ फल को प्रभावित कर सकता है. इस पावन दिन पर किसी का अपमान या अनादर करने से भी बचना जरूरी है, वरना सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है. पूजा के समय मन को शांत रखते हुए पूरी श्रद्धा, शुद्धता और एकाग्रता के साथ आराधना करनी चाहिए, तभी इस शुभ अवसर का पूर्ण लाभ और सौभाग्य प्राप्त होता है.

अक्षय तृतीया 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी.

पूजा का शुभ मुहूर्त:

इस दौरान पूजा, दान और खरीदारी करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.

क्यों खास है अक्षय तृतीया?

‘अक्षय’ शब्द का अर्थ होता है जो कभी खत्म न हो. इसलिए इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल जीवनभर मिलता है. यह पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. खासतौर पर जब यह तिथि रोहिणी नक्षत्र या विशेष वार के साथ पड़ती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.

सोना खरीदने की परंपरा और मान्यता

अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी कम नहीं होता, बल्कि समय के साथ बढ़ता है और घर में धन-वैभव लाता है. इसी वजह से इस दिन ज्वेलरी, संपत्ति या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने का चलन काफी लोकप्रिय है.

इस दिन क्या करें? (शुभ कार्य)

अक्षय तृतीया पर कुछ खास कार्य करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं:

व्रत, स्नान और पितरों का तर्पण

इस दिन व्रत रखना और पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. यदि संभव हो, तो गंगा स्नान या किसी पवित्र जल स्रोत में स्नान करें.

इसके अलावा:

ऐसा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

इस दिन विशेष रूप से नकारात्मक सोच और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहना चाहिए. साथ ही, किसी का अपमान या अनादर करने से बचें, क्योंकि यह दिन शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. पूजा-अर्चना करते समय पूरी श्रद्धा, शुद्धता और मन की एकाग्रता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है.

Published: 15 Apr, 2026 | 06:45 AM

Topics: