असम में पहली बार शुरू हुआ कमर्शियल माचा चाय का उत्पादन, दुनिया के प्रीमियम टी बाजार में भारत की एंट्री
Matcha Tea India: असम ने पहली बार कमर्शियल स्तर पर माचा (Matcha) चाय का उत्पादन शुरू कर नया इतिहास रच दिया है. तिनसुकिया के छोटा तिंगराई टी एस्टेट में तैयार हुई पहली माचा चाय 3,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी. यह सफलता भारत और जापान के तकनीकी सहयोग से संभव हुई है.
Matcha Tea Production In Assam: भारत की चाय पूरी दुनिया में अपनी खास पहचान रखती है और इसमें असम का सबसे बड़ा योगदान रहा है. अब असम ने चाय के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राज्य में पहली बार माचा (Matcha) चाय का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है. तिनसुकिया जिले के छोटा तिंगराई टी एस्टेट ने भारत की पहली कमर्शियल माचा चाय तैयार कर बाजार में उतारी है.
इसकी पहली खेप गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर में 3,000 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकी. इसे असम के चाय उद्योग के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है. इससे भारत को प्रीमियम चाय के वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी.
असम की चाय को मिली नई पहचान
अब तक असम की पहचान दुनिया भर में उसकी मजबूत स्वाद वाली ब्लैक टी के लिए रही है. लेकिन अब राज्य ने प्रीमियम स्पेशलिटी टी की दुनिया में भी कदम रख दिया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे असम और देश के चाय उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि अब तक माचा चाय का उत्पादन मुख्य रूप से जापान, चीन और वियतनाम जैसे देशों में होता था, लेकिन अब भारत भी इस खास चाय के वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है.
भारत-जापान की साझेदारी का मिला फायदा
माचा चाय के उत्पादन में भारत और जापान के तकनीकी सहयोग की अहम भूमिका रही है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, जापानी विशेषज्ञों की मदद, आधुनिक मशीनों और नई तकनीकों के इस्तेमाल से असम में हाई क्वालिटी वाली माचा चाय का उत्पादन संभव हो पाया है. इससे भविष्य में भारतीय चाय को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है. साथ ही इससे निर्यात बढ़ेगा और चाय उद्योग से जुड़े किसानों व कारोबारियों को भी फायदा मिलेगा.
Your favourite Matcha brew, will now be produced in Assam.
Furthering our glorious tea legacy, Assam becomes the first State in India to commercially produce Matcha tea at the Chota Tingrai Tea Estate in Tinsukia.
This diversification to the viral drink will help strengthen… pic.twitter.com/Yyfigliorw
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 3, 2026
10 साल की मेहनत के बाद मिली सफलता
इस परियोजना पर पिछले 10 साल से लगातार काम किया जा रहा था. इस दौरान जापान के चाय विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और मशीन निर्माताओं के सहयोग से आधुनिक जापानी चाय प्रोसेसिंग यूनिट तैयार की गई. पहले यह एस्टेट हाई क्वालिटी वाली ग्रीन टी का उत्पादन करता था, लेकिन अब यहां असली भारतीय माचा चाय का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है. उनका कहना है कि यह असम की पारंपरिक चाय संस्कृति और जापानी तकनीक का बेहतरीन मेल है.
आखिर क्या होती है माचा चाय?
माचा (Matcha Tea) एक खास तरह की प्रीमियम ग्रीन टी होती है. इसे सामान्य ग्रीन टी की तरह नहीं बनाया जाता. इसकी पत्तियों को खास तरीके से उगाया जाता है और फिर उन्हें सावधानी से सुखाकर बारीक पाउडर तैयार किया जाता है. इसी पाउडर को गर्म पानी या दूध में मिलाकर पिया जाता है.
माचा चाय में एंटीऑक्सीडेंट, अमीनो एसिड और शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. यही वजह है कि फिटनेस और सेहत का ध्यान रखने वाले लोगों के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है.
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही मांग
पिछले कुछ सालों में माचा चाय की लोकप्रियता दुनिया भर में तेजी से बढ़ी है. फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं. हालांकि अभी इसका उत्पादन सीमित देशों में ही होता है. ऐसे में भारत में कमर्शियल स्तर पर उत्पादन शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खुल सकते हैं. इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और प्रीमियम चाय बाजार में देश की हिस्सेदारी मजबूत होगी.
किसानों और चाय उद्योग को होगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि माचा चाय का उत्पादन बढ़ने से असम के चाय उत्पादकों, बागान मालिकों और निर्यातकों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना है. साथ ही इससे राज्य के चाय उद्योग को नई दिशा मिलेगी और भारतीय चाय की पहचान सिर्फ ब्लैक टी तक सीमित नहीं रहेगी. आने वाले समय में माचा जैसी प्रीमियम चाय भारत के लिए बड़ा निर्यात उत्पाद बन सकती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और देश के चाय उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.