जिन पत्तों को समझ रहे थे घास-फूस वो निकला असली स्वाद-सेहत का खजाना, लिस्ट देखिए
अगर आप भी अपने बगीचे में उग आए इन पौधों को घास-फूस समझ कर उखाड़ फेंकते हैं तो जरा रुकिए. हो सकता हैं जिन्हें आप घास समझ रहे हैं वो आपके स्वाद और सेहत का खजाना बन जाएं. आइये जानते हैं ऐसे पौधों के बारे में..

इसी कड़ी में आज हम बगीचों में आस-पास उगने वाले कुछ ऐसे घास और पत्तियों के बारे में जो आपकी थाली में स्वाद और सेहत दोनों का तड़का लगाने में मदद कर सकता है.

कई जंगली पौधों में विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन की मात्रा पालक से भी ज्यादा होती है. आप इन्हें आम बोल चाल में साग भी कहते हैं. यह किसी भी परिस्थिति और जलवायु में बड़े आसानी से उग जाते है. इन्हें अधिक मात्रा में देखभाल की जरूरत नहीं होती है.

बथुआ सर्दियों में मिलने वाला पौष्टिक साग है, जो स्वाद और सेहत दोनों से भरपूर है. यह विटामिन, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने, खून की कमी दूर करने और आंखों की रोशनी तेज करने में मदद करते हैं. यह पथरी, स्किन प्रॉब्लम्स और माहवारी की समस्याओं में भी फायदेमंद होता है.

नोनी साग, पर्सलेन की एक प्रजाति है. इसे लूनी साग भी कहा जाता है. यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है और कई तरह के स्वास्थ्य लाभ देता है. नोनी साग का सेवन सर्दियों में ज़्यादा फ़ायदेमंद माना जाता है. इसे जितिया व्रत में भी खाया जाता है.

शेफर्ड पर्स, जिसे वैज्ञानिक रूप से कैप्सेला बर्सा-पास्टोरिस के नाम से जाना जाता है. इस पौधे का उपयोग सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता रहा है. इसका नाम छोटे, दिल के आकार के बीज की फली से आता है. शेफर्ड पर्स को कई तरह की बीमारियों, खासकर रक्तस्राव और सूजन से संबंधित बीमारियों के इलाज मदद करता है.

शीप सॉरेल एक छोटा, पतला, बारहमासी खरपतवार है, जो यूरोप और उत्तरी अमेरिका में पाया जाता है. इसे रुमेक्स एसिटोसेला (Rumex acetosella) के नाम से भी जाना जाता है. यह पौधा कम ऊंचाई का होता है, अक्सर एक फुट से अधिक नहीं बढ़ता है. इसके पत्ते तीर के आकार के होते हैं और एक खट्टा, तीखा स्वाद होता है. मई से अगस्त के बीच, इसमें हरे से लाल रंग के फूल खिलते हैं.

चिकवीड (Stellaria media) एक छोटा, फैलने वाला वार्षिक खरपतवार है, जो अपनी चिकनी, अंडाकार पत्तियों और सफेद, छोटे फूलों के लिए जाना जाता है. यह उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में आम है और अक्सर लॉन, बगीचों और खतों में पाया जाता है.

डंडेलियन की जड़ों में शक्तिशाली औषधीय गुण होते हैं, जो कुछ मामलों में कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी की तरह सहायक हो सकते हैं. रिसर्च में इसे वैकल्पिक चिकित्सा में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए उपयोगी बताया गया है. इसकी पत्तियां, फूल और जड़ सब कुछ खाया जा सकता है. पत्तियां सलाद में, फूलों से वाइन और जड़ को सुखाकर कॉफी बनाया जा सकता है.
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