अप्रैल से जून के बीच 9.74 लाख टन DAP का आयात, केंद्र सरकार ने जारी किए आंकड़े

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2010 से 'पोषक तत्व आधारित सब्सिडी' नीति लागू की है, जिसके तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों पर पोषक तत्वों के अनुसार सब्सिडी दी जाती है. इससे किसानों को उचित दाम पर उर्वरक मिलते हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 23 Jul, 2025 | 08:19 AM

DAP एक प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है, जिसकी मांग खासकर खरीफ के मौसम में बुवाई के समय बहुत ज्यादा होती है. देश के किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने लगातार काम कर रही है. खरीफ सीजन की मांग को ध्यान में रखते हुए भारत ने अप्रैल से जून 2025 के बीच करीब 9.74 लाख टन DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद का आयात किया है. यह जानकारी केंद्र सरकार ने कंपनियों द्वारा उपलब्ध डाटा के अनुसार साझा की है.

कितने महीने में कितना हुआ आयात?

द इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में जानकारी दी कि डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) के आयात के ये आंकड़े विभिन्न कंपनियों से प्राप्त रिपोर्ट पर आधारित हैं. अप्रैल 2025 में 2.89 लाख टन, मई में 2.36 लाख टन और जून में 4.49 लाख टन डीएपी का आयात किया गया. इस तरह अप्रैल से जून तिमाही में कुल 9.74 लाख टन डीएपी देश में आया, ताकि किसानों की फसल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और खरीफ सीजन में उर्वरक की कोई कमी न हो.

बीते वर्षों में कैसा रहा DAP आयात?

पिछले कुछ सालों में भी DAP का आयात लगातार बड़े स्तर पर हुआ है:

  • 2024-25 (अब तक): 45.69 लाख टन
  • 2023-24: 55.67 लाख टन
  • 2022-23: 65.83 लाख टन
  • 2021-22: 54.62 लाख टन
  • 2020-21: 48.82 लाख टन

इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार खाद की उपलब्धता को लेकर लगातार सक्रिय है.

खरीफ 2025 की जरूरतें होंगी पूरी

अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इस बार खरीफ सीजन में बुवाई का दायरा बढ़ा है और मानसून भी अनुकूल है, इसलिए रासायनिक खादों की मांग थोड़ी अधिक है. इस जरूरत को देखते हुए सरकार पूरी तरह से तैयार है.

क्या है पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2010 से ‘पोषक तत्व आधारित सब्सिडी’ (Nutrient Based Subsidy – NBS) नीति लागू की है, जिसके तहत फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों पर पोषक तत्वों के अनुसार सब्सिडी दी जाती है. इससे किसानों को उचित दाम पर उर्वरक मिलते हैं.

वैश्विक सहयोग और दीर्घकालिक समझौते

मंत्री ने बताया कि आपूर्ति में किसी भी बाधा से निपटने के लिए भारत की उर्वरक कंपनियों ने DAP बनाने वाले देशों से दीर्घकालिक समझौते किए हैं. इसका मकसद यह है कि कोई भी भू-राजनीतिक संकट या सप्लाई चेन की रुकावट उर्वरक की उपलब्धता को प्रभावित न करे.

यूरिया के आयात में आई गिरावट

जहां DAP का आयात बढ़ रहा है, वहीं यूरिया के आयात में कुछ कमी आई है:

  • 2024-25 (अब तक): 56.47 लाख टन
  • 2023-24: 70.42 लाख टन
  • 2022-23: 75.80 लाख टन
  • 2021-22: 91.36 लाख टन
  • 2020-21: 98.28 लाख टन

सरकार का कहना है कि अब घरेलू उत्पादन भी बढ़ रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता थोड़ी कम हो रही है.

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Published: 23 Jul, 2025 | 08:16 AM
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