4 महीने बाद केंद्र का बड़ा फैसला, LNG सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटाईं, जानें किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
LNG Supply: पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाया गया इमरजेंसी बैन हटा दिया है. चार महीने पहले एलएनजी (LNG) की सप्लाई प्रभावित होने के कारण सरकार ने गैस के वितरण पर नियंत्रण लगाया था.
Natural Gas Supply: पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और वितरण पर लगाए गए इमरजेंसी बैन हटा दिए हैं. करीब चार महीने पहले सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया था क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते एलएनजी (LNG) की सप्लाई प्रभावित हो गई थी. अब सीजफायर और समुद्री मार्ग दोबारा खुलने के बाद गैस की आपूर्ति सामान्य होने लगी है.
ऐसे में सरकार ने 5 जुलाई से इन पाबंदियों को हटाने का फैसला किया है. इस फैसले से गैस कंपनियों, उद्योगों और उन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ महीनों से सीमित गैस आपूर्ति के कारण प्रभावित थे.
आखिर क्यों लगाए गए थे प्रतिबंध?
मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से एलएनजी की आवाजाही प्रभावित हो गई थी. कई अंतरराष्ट्रीय गैस आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) घोषित कर दिया था, यानी वे तय समय पर गैस की आपूर्ति करने में असमर्थ थे. इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलएनजी आयात करता है. गैस की उपलब्धता कम होने लगी तो सरकार ने जरूरी उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने के लिए इमरजेंसी नियम लागू कर दिए.
सरकार ने क्या फैसला लिया था?
9 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर जारी किया था. इसके तहत सरकार को प्राकृतिक गैस, एलएनजी और री-गैसीफाइड एलएनजी के उत्पादन, आवंटन, वितरण और खपत को नियंत्रित करने का अधिकार मिला था.
सरकार यह तय कर सकती थी कि किस सेक्टर को कितनी गैस मिलेगी. इसका मकसद यह था कि बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और अन्य जरूरी क्षेत्रों में गैस की कमी न हो और आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों.
अब क्यों हटाए गए नियंत्रण?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्षविराम लागू होने और बातचीत शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है. समुद्री मार्ग खुलने के बाद एलएनजी की सप्लाई में सुधार आया है और गैस उपलब्धता को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रही. इसी वजह से सरकार ने इमरजेंसी बैन हटाने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि अब बाजार में गैस की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, इसलिए पहले जैसी सख्त निगरानी की जरूरत नहीं है.
उद्योगों और गैस कंपनियों को क्या फायदा होगा?
प्रतिबंध हटने के बाद गैस आपूर्ति से जुड़ी कंपनियां अब पहले की तरह अपने ग्राहकों को व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार गैस उपलब्ध करा सकेंगी. पहले सरकार की ओर से प्राथमिकता तय की जाती थी और कई सेक्टरों को सीमित मात्रा में गैस मिल रही थी. अब कंपनियों को आपूर्ति और वितरण में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी. इससे बिजली, उर्वरक, सीएनजी, पीएनजी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है.
चार महीने पहले क्यों उठाना पड़ा था यह कदम?
सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि एलएनजी की सप्लाई बाधित होने के कारण देश में गैस की कमी पैदा हो सकती थी. इसलिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए गैस का समान और प्राथमिकता आधारित वितरण सुनिश्चित किया गया था. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि अस्पतालों, बिजली संयंत्रों, उर्वरक उद्योग और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में गैस की कमी न होने पाए.