फैक्ट्रियों में कृषि ग्रेड यूरिया इस्तेमाल का चल रहा गोरखधंधा, पॉलीमर फैक्ट्री से 1360 बोरी खाद जब्त

Agriculture Grade Urea Scam : बीकेई प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने किसान इंडिया को बताया कि देशभर में कृषि यूरिया का इस्तेमाल कमर्शियल में किए जाने का गोरखधंधा चल रहा है. कृषि कार्यों के लिए यूरिया की बोरी सब्सिडी पर 1350 रुपये में मिलती है. जबकि, कमर्शियल यूज के लिए यूरिया की बोरी 3250 रुपये में मिलती है.

नोएडा | Updated On: 26 Jul, 2026 | 03:34 PM

केरल के पुल्लुवाझी स्थित पॉलीमर बनाने वाली फैक्टरी में कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया की 1,360 बोरियों के अवैध भंडारण को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. कुरुप्पमपडी पुलिस ने रायमंगलम कृषि भवन के कृषि अधिकारी की शिकायत के आधार पर एब्सन पॉलीमर्स फैक्ट्री के मालिक इहसानुल रहमान के. एस. के खिलाफ मामला दर्ज किया है. हरियाणा में भी इसी तरह के मामलों का खुलासा करने वाले किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने किसान इंडिया को बताया कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से किसानों की यूरिया को कालाबाजारी कर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल की जा रही है और खुलेआम किसानों के हक पर डाका डाला जा रहा है.

केरल में यूरिया की 1360 बोरियों का अवैध स्टॉक जब्त करने के मामले में अधिकारियों ने रविवार को न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. यह जांच तब शुरू हुई जब यहां के पास पुलुवझी में एक पॉलीमर बनाने वाली फैक्ट्री में खेती के काम आने वाली यूरिया की बोरियां अवैध रूप से जमा पाई गईं हैं. कुरुप्पमपाडी पुलिस ने रायामंगलम कृषि भवन के कृषि अधिकारी की शिकायत पर एब्सन पॉलिमर्स के मालिक एहसानुल रहमान के.एस. के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

कृषि अधिकारी की शिकायत पर छापेमारी की गई

पुलिस ने बताया कि जब्त की गई यूरिया सिर्फ खेती के काम के लिए थी और किसानों को बहुत कम कीमत यानी सब्सिडी वाली दरों पर दी जाती है. इसे कमर्शियल कामों के लिए बेचना और इस्तेमाल करना मना है. पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कथित तौर पर सब्सिडी वाली यूरिया खाद की बड़ी मात्रा खरीदी और फैक्ट्री में बनाने की प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया. यह जब्ती 23 जुलाई को की गई, जब कृषि अधिकारी को सूचना मिली और उन्होंने फैक्ट्री परिसर की जांच की, जहां यूरिया की बोरियां जमा पाई गईं.

दूसरे राज्यों की यूरिया सप्लाई की आशंका, सैंपल लैब भेजे

छापेमारी करने वाले अधिकारियों ने कहा कि यह जब्ती ऐसे समय में हुई है जब बाजार में यूरिया की कमी है. पुलिस ने आगे बताया कि जब्त की गई खाद के सैंपल उसकी क्वालिटी की जांच के लिए कृषि विभाग की लैब में भेजे गए हैं. कृषि अधिकारियों ने इलाकों में जांच अभियान शुरू कर दिया है. आशंका जताई जा रही है कि दूसरे राज्यों से यूरिया की अवैध तरीके की सप्लाई की जा रही है.

प्लाईवुड में गोंद के रूप में इस्तेमाल के लिए यूरिया खरीदने का दावा

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने कहा कि इस बात का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच चल रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाली खेती की यूरिया कैसे खरीदी गई. आरोपी ने दावा किया कि उसने प्लाईवुड बनाने में इस्तेमाल होने वाला गोंद बनाने के लिए यूरिया खरीदी थी.

कृषि यूरिया सस्ती मिलने से स्कैम पर कमर्शियल यूज हो रहा – औलख

भारतीय किसान एकता के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने किसान इंडिया को बताया कि देशभर में कृषि यूरिया का इस्तेमाल कमर्शियल में किए जाने का गोरखधंधा चल रहा है. कृषि कार्यों के लिए यूरिया की बोरी सब्सिडी पर 1350 रुपये में मिलती है. जबकि, कमर्शियल यूज के लिए यूरिया की बोरी 3250 रुपये से ज्यादा कीमत पर मिलती है. ऐसे में मिलीभगत करके कृषि ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल कमर्शियल में किया जा रहा है. उन्होंने जिम्मेदारों के मिलीभगत का भी इशारा किया है.

ढुलमुल कार्रवाई से किसानों के हक पर डाका डालने से चूक नहीं रहे जालजास

किसान नेता लखविंदर औलख ने कहा कि हरियाणा के सिरसा में वह इथेनॉल प्लांट में कृषि यूरिया के इस्तेमाल का खुलासा कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे में मामलों में पुलिस आरोपियों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर लेती है, लेकिन आगे कार्रवाई ढीली और धीमी होने से यह गोरखधंधा करने वाले रुकते नहीं हैं और किसानों के हक की यूरिया पर डाका डाला जाता है. उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसे मामलों में सख्ती दिखाने और नियम कड़े करने की मांग की है.

Published: 26 Jul, 2026 | 03:25 PM

Topics: