मिल्क प्लांट के बाहर फूटा किसानों का गुस्सा, 26 हजार डेयरी किसानों का 3 माह से अटका है पैसा

Himachal Dairy Farmers Protest: डेयरी किसान हर लगभग डेढ़ लाख लीटर दूध की आपूर्ति करते हैं. लेकिन, सहकारी दुग्ध प्लांट ने 3 महीने का दूध बकाया भुगतान नहीं किया है. नाराज डेयरी किसानों ने प्लांट के बाहर जमकर हंगामा किया.

नोएडा | Updated On: 22 Jul, 2026 | 06:56 PM

हिमाचल प्रदेश में दत्तनगर मिल्क प्लांट के बाहर आज दुग्ध उत्पादकों का गुस्सा फूट पड़ा.पिछले तीन महीनों से दूध का भुगतान न मिलने के विरोध में बड़ी संख्या में किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भुगतान में लगातार हो रही देरी से करीब 26 हजार दुग्ध उत्पादकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. महिला डेयरी किसानों ने चेतावनी देते हुए भुगतान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.

महिला किसानों ने विरोध में रैली निकाली

भाजपा किसान मोर्चा के नेतृत्व में महिला और पुरुष डेयरी किसानों ने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के समीप स्थित दत्तनगर मिल्क प्लांट के बाहर  और धरना-प्रदर्शन किया. रामपुर, ननखड़ी, कुमारसैन, आनी और निरमंड से पहुंचे किसानों, विशेषकर महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर रैली निकाली और सरकार व मिल्क फेड के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन में किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजीव देष्टा, भाजपा के रामपुर से पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कौल नेगी, जिला परिषद सदस्य तथा विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.

26 हजार किसान रोजाना 1.5 लाख लीटर दूध देते हैं

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार दूध के दाम बढ़ाने की बात तो करती है, लेकिन किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दत्तनगर मिल्क प्लांट से जुड़े करीब 26 हजार दुग्ध उत्पादक प्रतिदिन लगभग डेढ़ लाख लीटर दूध की आपूर्ति करते हैं. इसके बावजूद तीन-तीन महीने तक भुगतान नहीं किया गया है.

समय पर बैंक की किस्तें नहीं चुका पा रहे डेयरी किसान

डेयरी किसानों ने कहा कि महीनों तक भुगतान नहीं किए जाने से पशुपालकों को बैंक ऋण की किस्तें चुकाने में दिक्कत हो रही है. जबकि, बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. नाराज महिला दुग्ध उत्पादकों ने प्लांट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दूध समय पर नहीं उतारा जाता और दूध के बर्तनों की सफाई की समुचित व्यवस्था भी नहीं है.

पशुओं का चारा और दवाई खरीदने की मुश्किल

दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचीं महिला दुग्ध उत्पादकों ने कहा कि पशुपालन में चारा, दवाइयों और पशुओं की देखभाल पर लगातार खर्च होता है. ऐसे में यदि दूध का भुगतान समय पर न मिले तो परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है. महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं दूध बेचकर परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. लेकिन भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

दूध किसानों और प्रदर्शनकारियों ने सरकार और मिल्क फेड से लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. फिलहाल इस मामले में मिल्क फेड या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

Published: 22 Jul, 2026 | 06:49 PM

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