गेहूं की घरेलू कीमतों और निर्यात पर सरकार की नजर, Wheat Export कोटा की समीक्षा शुरू
Wheat Export : केंद्र सरकार के निर्देश पर विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गेहूं के निर्यात के लिए पहले से दिए गए कोटे की समीक्षा शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि घरेलू कीमतों और भंडारण को लेकर सरकार सजग है और इसीलिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
केंद्र सरकार ने गेहूं की घरेलू कीमतें, उपलब्धता को देखते हुए निर्यात कोटा की समीक्षा शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सीमित मात्रा में गेहूं निर्यात की मंजूरी दी थी. अब जो ट्रेडर्स गेहूं निर्यात कर रहे थे उनके गेहूं स्टॉक, शिपिंग समेत अन्य दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है. केंद्र के निर्देशों पर विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने निर्यातकों को जारी नोटिस में 31 अगस्त तक स्पष्टता मांगी है. मान जा रहा है कि सरकार इसके बाद निर्यात बढ़ाने या रोकने पर विचार करेगी.
गेहूं निर्यात कोटा की समीक्षा क्यों की जा रही
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गेहूं के निर्यात के लिए पहले से दिए गए कोटे की समीक्षा शुरू कर दी है. इस समीक्षा का मकसद यह पता लगाना है कि निर्यातकों ने उन्हें मिला गेहूं का कितना कोटा इस्तेमाल किया है और कितना कोटा अभी बचा हुआ है. जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल नहीं हुए कोटे को दूसरे निर्यातकों को दोबारा आवंटित किया जा सकता है. यह समीक्षा 24 फरवरी और 30 अप्रैल 2026 को जारी किए गए सार्वजनिक नोटिस के तहत दिए गए गेहूं निर्यात कोटे को लेकर की जा रही है.
गेहूं निर्यात संबंधी जानकारी देने के लिए 31 अगस्त तक का समय
DGFT ने कोटा पाने वाले सभी निर्यातकों से कहा है कि वे अब तक वास्तव में किए गए गेहूं निर्यात की जानकारी दें. इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से जारी Utilisation Certificate और संबंधित Shipping Bills की डिटेल्स देनी होंगी. निर्यातकों को 26 अगस्त 2026 तक किए गए निर्यात की मात्रा की जानकारी देनी होगी. निर्यातकों को यह जानकारी सरकार को देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है.
अतिरिक्त गेहूं चाहिए तो कर सकेंगे आवेदन
DGFT ने निर्यातकों को अतिरिक्त गेहूं कोटे की मांग करने का विकल्प भी दिया है. अगर किसी निर्यातक को आगे निर्यात के लिए और गेहूं चाहिए तो वह अतिरिक्त कोटे की मांग कर सकता है. इसके लिए अतिरिक्त गेहूं की जरूरत का कारण बताना होगा. साथ ही निर्यातक को अपना पूरा आवंटित कोटा इस्तेमाल नहीं करना है तो बची हुई मात्रा को सरेंडर करने का अनुरोध भी किया जा सकता है.
अतिरिक्त कोटे की मांग करने वाले निर्यातक अपने दावे के समर्थन में वैध निर्यात अनुबंध या खरीद आदेश की कॉपी भी जमा कर सकते हैं. इससे यह साबित करने में मदद मिलेगी कि उन्हें वास्तव में अतिरिक्त गेहूं की जरूरत है.
50% से ज्यादा कोटा इस्तेमाल करने वालों को फायदा
नई व्यवस्था में कोटे के इस्तेमाल को खास महत्व दिया गया है. जिन निर्यातकों ने अपने आवंटित गेहूं कोटे का 50 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल कर लिया है, उन्हें आगे होने वाले आवंटन में फिर से शामिल किया जा सकता है. वहीं, जिन निर्यातकों ने 50 फीसदी से कम कोटा इस्तेमाल किया है, उनके बचे हुए कोटे को वापस लेकर एक कॉमन पूल में रखा जा सकता है. बाद में इस गेहूं को दूसरे पात्र निर्यातकों को आवंटित किया जाएगा.
हालांकि, अगर 50 फीसदी से कम कोटा इस्तेमाल करने वाला निर्यातक यह साबित कर देता है कि उसके पास वैध निर्यात अनुबंध या खरीद आदेश मौजूद है, तो उसकी बची हुई मात्रा को कॉमन पूल में डालने से बचाया जा सकता है.
DGFT ने ट्रेड नोटिस जारी किया है.
DGFT करेगा अंतिम फैसला
कॉमन पूल में उपलब्ध गेहूं का दोबारा आवंटन DGFT महानिदेशक की ओर से निर्यातकों की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों और जरूरत के आधार पर किया जाएगा. DGFT ने यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय पर जानकारी नहीं देने वाले निर्यातकों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. साथ ही प्राप्त आवेदनों और उपलब्ध गेहूं की मात्रा को देखते हुए DGFT जरूरत पड़ने पर आवंटन और वितरण की प्रक्रिया में बदलाव भी कर सकता है.
निर्यात बढ़ाने, घरेलू कीमतें, उपलब्धता बनाए रखना भी उद्देश्य
DGFT की इस कार्रवाई को बाजार एक्सपर्ट दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं. माना जा रहा है कि सरकार घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें स्थिर बनाए रखने के साथ ही उपलब्धता और स्टॉक पर्याप्त रखने के उद्देश्य से यह समीक्षा की जा रही है. ताकि, गेहूं निर्यात आगे भी जारी रखने पर फैसला लिया जा सके. यह भी कहा जा रहा है कि अल नीनो के असर से खरीफ फसलों के उत्पादन घटने और रबी सीजन की बुवाई के वक्त गर्मी अधिक बनी रहने का असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है. ऐसे में सरकार पहले से एहतियाती कदम उठा रही है.