नारियल किसानों की बढ़ी चिंता, 250 से 130 रुपये पर आया भाव, सरकार से खरीद और MSP बढ़ाने की मांग
Coconut Price Drop: तमिलनाडु में नारियल किसानों ने नारियल और खोपरा के गिरते दामों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है. किसानों का कहना है कि छह, महीने पहले खोपरा करीब 250 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन अब इसका भाव घटकर सिर्फ 130 से 135 रुपये प्रति किलो रह गया है.
Coconut Price Crash: देश में खेती-किसानी कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है. कहीं मौसम किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है तो कहीं फसलों के गिरते दाम उनकी कमाई पर असर डाल रहे हैं. इन दिनों तमिलनाडु के नारियल किसानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही बनी हुई है. नारियल और खोपरा के दामों में आई भारी गिरावट के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसी वजह से किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने और उनकी उपज की खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है.
तमिलनाडु नारियल किसान संघ के बैनर तले किसानों ने रामनाथपुरम और तंजावुर जिलों में प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि, अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो नारियल की खेती करना मुश्किल हो जाएगा.
कीमतों में आई भारी गिरावट
किसानों के अनुसार, करीब छह महीने पहले तक खोपरा 250 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रहा था. लेकिन अब इसकी कीमत घटकर केवल 130 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है. यानी कुछ ही महीनों में दाम लगभग आधे हो गए हैं. कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा असर नारियल किसानों की आय पर पड़ रहा है. उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. इससे नारियल उत्पादकों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है.
कई जिलों में किसानों का प्रदर्शन
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रामनाथपुरम जिले में तमिलनाडु नारियल किसान संघ के जिला अध्यक्ष सी. शिवानंदम के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया. इसके बाद किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा.
वहीं तंजावुर जिले के पट्टुकोट्टई क्षेत्र में किसानों ने राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया. इस आंदोलन का नेतृत्व संघ के कोषाध्यक्ष एम. सेल्वम ने किया. दोनों जगह किसानों ने सरकार से तुरंत राहत उपाय लागू करने की मांग उठाई.
सरकार से क्या मांग कर रहे हैं किसान?
किसानों का कहना है कि, नारियल और खोपरा के गिरते दामों को रोकने के लिए सरकार को सीधे खरीद करनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि, बिना छिलके वाले नारियल की खरीद 60 रुपये प्रति फल की दर से की जाए. इसके अलावा छिलके सहित नारियल का न्यूनतम मूल्य 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया जाए. किसानों ने खोपरा के लिए 180 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने की भी मांग की है. उनका मानना है कि, सरकारी खरीद शुरू होने से बाजार में कीमतों को सहारा मिलेगा और किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा.
कीट और बीमारियों ने भी बढ़ाई परेशानी
नारियल किसानों की मुश्किलें केवल कीमतों तक सीमित नहीं हैं. किसानों का कहना है कि, पिछले कुछ समय से नारियल के पेड़ों पर कीट और अलग-अलग बीमारियों का प्रकोप बढ़ा है. इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है और खेती की लागत भी बढ़ गई है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि, कृषि वैज्ञानिकों को इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता दी जाए, ताकि प्रभावी उपचार और नई तकनीक विकसित की जा सके. इससे भविष्य में किसानों को राहत मिल सकेगी.
कर्ज माफी और नए लोन की मांग
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सहकारी बैंकों से लिए गए पुराने कृषि लोन माफ करने की मांग भी उठाई. उनका कहना है कि, लगातार कम होती आय के कारण कई किसान कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं हैं. इसके साथ ही किसानों ने प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का नया कृषि लोन उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे खेती का काम सुचारु रूप से जारी रख सकें और आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें.