El Nino Impact: भारत का चीनी उद्योग आने वाले सालों को लेकर उम्मीदें लगाए हुए है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी चिंता बढ़ा रही है. उनका मानना है कि अल नीनो (El Nino) के कारण मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे गन्ने की खेती प्रभावित हो सकती है. अगर बारिश सामान्य से कम हुई, तो इसका असर चीनी उत्पादन पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की यह स्थिति सिर्फ 2026-27 ही नहीं, बल्कि 2027-28 सीजन तक भी प्रभाव डाल सकती है. ऐसे में किसानों और चीनी उद्योग दोनों की नजर मॉनसून की स्थिति पर बनी हुई है.
क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ रही है चिंता?
अल नीनो एक ऐसी मौसमीय स्थिति है, जिसमें समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो अक्सर बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ जाती है. इसी वजह से खेती-किसानी पर इसका असर पड़ता है, खासकर उन फसलों पर जिन्हें ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर बारिश कम हो जाए, तो फसलों की पैदावार घट सकती है और किसानों की चिंता बढ़ सकती है.
गन्ने की फसल पर पड़ सकता है सीधा असर
गन्ना ऐसी फसल है, जिसकी अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त पानी और समय-समय पर बारिश जरूरी होती है. अगर मॉनसून कमजोर रहा, तो खेतों में पानी की कमी हो सकती है, जिससे गन्ने की बढ़त प्रभावित हो सकती है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों की उपज कम हो सकती है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अगर बारिश सामान्य से कम हुई तो भारत और थाईलैंड जैसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में चीनी उत्पादन 10 से 20 लाख टन तक घट सकता है. इससे चीनी उद्योग और बाजार दोनों पर असर पड़ने की आशंका है.
चीनी उत्पादन पर भी मंडरा रहा खतरा
गन्ने की फसल कम होने का सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ता है. फिलहाल भारत को उम्मीद है कि अगले सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन अगर मौसम ने साथ नहीं दिया तो ये अनुमान बदल सकते हैं.
उत्पादन कम होने की स्थिति में बाजार में चीनी की उपलब्धता घट सकती है. इसका असर कीमतों पर भी पड़ सकता है और चीनी के दाम ऊपर-नीचे हो सकते हैं. ऐसे में किसानों से लेकर चीनी उद्योग और उपभोक्ताओं तक, सभी की नजर मौसम और मॉनसून की स्थिति पर बनी हुई है.
दुनिया के चीनी बाजार पर भी होगा असर
वैश्विक स्तर पर चीनी का भंडार पहले से ही सीमित बताया जा रहा है. वहीं, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में से एक ब्राजील में कई चीनी मिलें अब चीनी की बजाय इथेनॉल बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. ऐसे में अगर भारत और थाईलैंड में भी चीनी उत्पादन कम होता है, तो दुनिया भर में चीनी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता घटने और कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
2027-28 तक रह सकता है असर
मौसम में होने वाला यह बदलाव सिर्फ एक सीजन तक सीमित नहीं रह सकता. अगर अल नीनो का असर लंबे समय तक बना रहता है, तो 2027-28 तक गन्ने की खेती और चीनी उद्योग पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है.
इस स्थिति में किसानों, चीनी मिलों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल भारत का चीनी उद्योग बेहतर उत्पादन और निर्यात की उम्मीद कर रहा है, लेकिन कमजोर मॉनसून और अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां इन उम्मीदों को प्रभावित कर सकती हैं.