35 से ज्यादा गांवों के किसानों का हल्लाबोल, पैदल मार्च में नारेबाजी.. बीज विधेयक वापस लेने की मांग

Haryana Farmers Protest : बीकेई के किसान नेता ने कहा कि पैदल मार्च में 35 से ज्यादा गांवों के किसानों ने भाग लिया और अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियां अन्नदाता बर्दाश्त नहीं करेगा.

नोएडा | Published: 5 Aug, 2026 | 04:33 PM

हरियाणा में संयुक्त किसान मोर्चा गैरराजनीतिक के नेतृत्व में 35 से ज्यादा गांवों के सैकड़ों किसानों ने सिरसा जिले में पैदल मार्च निकाला और सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार अमेरिका के साथ की जा रही ट्रेड डील को वापस ले और बिजली संशोधन विधेयक, बीज विधेयक 2025 को रद्द किया जाए. इसके साथ ही फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की पूरी भरपाई कराई जाए. किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि किसानों की मांग संबंधी पीएम को संबोधित ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपा गया है.

किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीणों की राष्ट्रीय एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) भारत की ओर से राष्ट्रपति के नाम तथा भारतीय किसान एकता (बीकेई) की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम अलग-अलग विस्तृत मांग-पत्र प्रशासन के माध्यम से सौंपे गए. बीकेई अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि जाट धर्मशाला में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) व बीकेई पदाधिकारियों की मीटिंग हुई. इसके बाद किसान पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और जिला उपायुक्त के साथ लंबी मीटिंग के बाद उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों को सरकार तक पहुंचाकर तुरंत समाधान करवाया जाएगा.

अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट वापस लिए जाएं

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने अपने मांग-पत्र में केंद्र सरकार से किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के साथ ही स्वामीनाथन आयोग की सी-2+50 प्रतिशत सिफारिशों को लागू करने की मांग की है. इसके साथ ही किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करने के साथ ही मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की बात कही है. बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 वापस लेने की मांग भी की गई है. जबकि, किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का पूर्ण मुआवजा देने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में व्यापक सुधार करने तथा खेती-किसानी को बचाने वाली किसान हितैषी नीतियां लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई है.

कपास, धान और ग्वार फसलों के लिए राहत पैकेज जारी हो

भारतीय किसान एकता (बीकेई) की ओर से हरियाणा सरकार को सौंपे गए मांग-पत्र में सिरसा जिले सहित प्रदेश के किसानों की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया. मांग पत्र में खरीफ 2026 के दौरान अल्प वर्षा, नहरी पानी एवं बिजली की कमी से खराब हुई धान, नरमा, कपास, ग्वार सहित सभी फसलों के लिए विशेष राहत पैकेज और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की गई है. इसके अलावा नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने, किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही डीएपी एवं यूरिया की कालाबाजारी रोकने की मांग की गई है. किसानों ने नकली बीज एवं कीटनाशकों पर कार्रवाई करने, लंबित फसल मुआवजा एवं फसल बीमा क्लेम जारी करने के लिए नारेबाजी भी की.

35 से ज्यादा गांवों के किसानों का हल्लाबोल

किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि आवारा पशुओं एवं जंगली सूअरों से किसानों की सुरक्षा की व्यवस्था सरकार करे. उन्होंने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल की समस्याओं का समाधान के साथ ही सभी फसलों की समय पर सरकारी खरीद तथा किसानों के लंबित भुगतान और सब्सिडी जारी करने की मांग की है. किसान नेता ने कहा कि पैदल मार्च में 35 से ज्यादा गांवों के किसानों ने भाग लिया और अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियां अन्नदाता बर्दाश्त नहीं करेगा.

किसानों के मुद्दों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में लगातार विफल रही हैं. यदि राष्ट्रीय एवं स्थानीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) एवं भारतीय किसान एकता आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकारों की होगी. उन्होंने कहा कि किसान केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. इसलिए सरकारों को किसान विरोधी नीतियां छोड़कर किसानों के साथ न्याय करना चाहिए.

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