मॉनसून की चिंता खत्म? बंगाल में खरीफ, बिहार में रबी सीजन से शुरू होगी PMFBY, जान लें डिटेल्स

PMFBY In Bengal-Bihar: पश्चिम बंगाल के किसानों को इस खरीफ सीजन से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिलने वाला है. माना जा रहा है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को इसकी शुरुआत करेंगे. बिहार भी अगले रबी सीजन से इस योजना में शामिल हो सकता है.

नोएडा | Updated On: 18 Jun, 2026 | 02:06 PM

Fasal Bima Yojana: देश में मॉनसून की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच किसानों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है. पश्चिम बंगाल के किसानों को अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का लाभ मिलने जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को राज्य में इस योजना की औपचारिक शुरुआत कर सकते हैं. इससे लाखों किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.

खरीफ सीजन से शुरू होगा लाभ

पश्चिम बंगाल में इस खरीफ सीजन से योजना लागू होने की संभावना है. ऐसे समय में जब मौसम विभाग कमजोर मॉनसून की आशंका जता रहा है, यह योजना किसानों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन सकती है. फसल उत्पादन पर मौसम का सीधा असर पड़ता है और कई बार अत्यधिक बारिश, सूखा या अन्य प्राकृतिक कारण किसानों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में फसल बीमा योजना आर्थिक संबल प्रदान करती है.

इसके अलाव पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार ने ‘आयुष्मान भारत’, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’, और ‘अन्नपूर्णा योजना’ (महिलाओं के लिए 3000 मासिक रुपये) जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं भी लागू कर दी हैं.

बिहार समेत अन्य राज्यों में भी विस्तार

पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार भी जल्द ही इस योजना का हिस्सा बनने जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले रबी सीजन से बिहार में भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की जाएगी. वहीं, आंध्र प्रदेश और झारखंड जैसे राज्य पहले ही इस योजना में दोबारा शामिल हो चुके हैं.

कैसे काम करती है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक फसल सुरक्षा प्रदान करती है. इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम, कीटों, बीमारियों तथा जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है. इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम प्रीमियम दरें हैं. किसानों को खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है. रबी फसलों के लिए यह दर 1.5 प्रतिशत निर्धारित है, जबकि नकदी और व्यावसायिक फसलों के लिए किसानों को 5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है. शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं.

मुआवजे के आंकड़े बताते हैं योजना की उपयोगिता

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2016 में योजना शुरू होने के बाद से किसानों को 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जा चुका है. यह राशि किसानों द्वारा जमा किए गए कुल प्रीमियम से लगभग पांच गुना अधिक है. इससे साफ होता है कि, आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में यह योजना किसानों के लिए कितनी उपयोगी साबित हुई है.

सरकार का लगातार बढ़ता निवेश

केंद्र सरकार भी इस योजना को मजबूत बनाने के लिए लगातार वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान के अनुसार इस योजना पर 12,267 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. वहीं, चालू वित्त वर्ष के बजट में 12,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वर्तमान में यह योजना देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित हो रही है.

Published: 18 Jun, 2026 | 12:43 PM

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