खाद को लेकर किसानों की चिंता खत्म! होर्मुज के रास्ते 6 लाख टन यूरिया-DAP लाएंगे शिपमेंट
Fertilizer Stock India: केंद्र सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि, खरीफ सीजन में खाद की कोई कमी नहीं होगी. देश में फिलहाल करीब 196.65 लाख टन उर्वरक का स्टॉक मौजूद है. पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने के बाद यूरिया और डीएपी से लदे कई जहाज भी जल्द भारत पहुंचने वाले हैं.
Fertilizer Supply India: देशभर के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि, खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. सरकार के अनुसार, देश में फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और विदेशों से यूरिया तथा डीएपी की नई खेप भी जल्द भारत पहुंचने वाली है. इससे खेती के मौसम में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार ने दिया भरोसा
उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक 14 जून तक देश में कुल 196.65 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है. यह मात्रा मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. सरकार का कहना है कि किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है. पश्चिम एशिया संकट को लेकर हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में उर्वरक मंत्रालय की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होने पर खाद की आपूर्ति और बेहतर हो सकती है. उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में उर्वरकों की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे किसानों को खाद मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
समुद्री मार्ग खुलने से बढ़ेगी उर्वरक आपूर्ति
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से समुद्री व्यापार को राहत मिली है. इसका सीधा फायदा भारत को भी मिलने वाला है. उर्वरक मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, होर्मुज का रास्ता सामान्य होने के बाद कई जहाज भारत के लिए रवाना होने की तैयारी में हैं. सरकार ने बताया है कि, करीब 12 जहाजों में 3.3 लाख टन यूरिया और 2.57 लाख टन डीएपी लदा हुआ है.
इसके अलावा 16 अन्य जहाज भी इस मार्ग से गुजरने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनमें उर्वरकों के साथ सल्फर और अमोनिया जैसी महत्वपूर्ण सामग्री भी मौजूद है. रास्ता पूरी तरह सामान्य होते ही ये जहाज अगले 7 से 10 दिनों के भीतर भारत पहुंच सकते हैं.
During the inter-ministerial briefing on recent developments in #WestAsia, Bandana Preyashi, Joint Secretary, Department of Fertilizers said that at present we see no major challenge to the availability of fertilizers for the ongoing Kharif season.
123.65 LMT of domestic… pic.twitter.com/1rGQvzEvZC
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) June 15, 2026
खरीफ सीजन की जरूरतों के लिए पूरी तैयारी
अप्रैल से सितंबर तक चलने वाले खरीफ सीजन को भारतीय कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा और कपास जैसी प्रमुख फसलों की खेती होती है. सरकारी अनुमान के अनुसार इस सीजन में लगभग 383.9 लाख टन उर्वरकों की जरूरत पड़ सकती है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि, 1 मार्च से 14 जून के बीच भारत ने 39.36 लाख टन उर्वरकों का आयात किया है, जबकि 123.65 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन देश के भीतर किया गया है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में लगातार काम कर रही है.
किसानों का बढ़ रहा है जैविक खाद की ओर रुझान
उर्वरक क्षेत्र में एक दिलचस्प बदलाव भी देखने को मिल रहा है. अब किसान केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि जैविक विकल्पों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक 11.82 लाख टन जैविक खाद की बिक्री हो चुकी है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 3.31 लाख टन था. यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि किसान मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ खेती को अपनाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं.
किन देशों से आ रही है खाद?
भारत अपनी उर्वरक जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से आयात करता है. यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, रूस, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से सहयोग लिया जा रहा है.
वहीं डीएपी और अन्य उर्वरकों की खरीद रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका और जॉर्डन जैसे देशों से की जा रही है. इससे भारत की खाद आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनी हुई है और किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने में मदद मिल रही है.