खाद्य तेल हो सकता है महंगा! सरकार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने पर कर रही विचार, रसोई बजट पर पड़ सकता है असर
Edible Oil Price Hike: केंद्र सरकार विदेशों से आने वाले खाद्य तेल पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रही है, जिससे आने वाले समय में खाने के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 फीसदी खाद्य तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश पर पड़ता है.
Cooking Oil Price Hike: आने वाले दिनों में आम लोगों की रसोई का बजट बढ़ सकता है. दरअसल रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार विदेशों से आने वाले खाद्य तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा फैसला लिया जाता है, तो पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो सकती हैं. हालांकि, सरकार इस कदम को सिर्फ महंगाई के नजरिए से नहीं बल्कि किसानों और देश की अर्थव्यवस्था से जोड़कर भी देख रही है.
आखिर क्यों बढ़ सकता है आयात शुल्क?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, देश में इस्तेमाल होने वाले कुल खाद्य तेल का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा इंपोर्ट किया जाता है. यानी अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है या सप्लाई कम होती है, तो उसका सीधा असर भारत के बाजार और लोगों की जेब पर पड़ता है. अब सरकार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है. माना जा रहा है कि इससे देश में तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा.
किसानों को कैसे होगा फायदा?
देश के घरेलू वनस्पति तेल उत्पादकों और किसान संगठनों का कहना है कि विदेशों से आने वाला सस्ता तेल भारतीय किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. जब बाजार में कम कीमत वाला विदेशी तेल बिकता है, तो सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी फसलों की कीमतों पर असर होगा.
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अगर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ता है, तो विदेशी तेल महंगा हो जाएगा और घरेलू किसानों की उपज को बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है. इससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है और तिलहन की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा.
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
जहां एक तरफ किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ सकती है. भारत में हर घर की रसोई में खाद्य तेल की जरूरत होती है. ऐसे में अगर आयात शुल्क बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है. खासतौर पर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए खाने-पीने की चीजों में बढ़ती महंगाई एक बड़ी चिंता बन सकती है.
अंतरराष्ट्रीय हालात भी बढ़ा रहे दबाव
हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी खाद्य तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाम ऑयल की कीमतों में करीब 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके पीछे एक बड़ी वजह इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में पाम ऑयल का इस्तेमाल बायोफ्यूल बनाने में बढ़ना भी माना जा रहा है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की उपलब्धता कम हुई है और कीमतें बढ़ी हैं.
पहले सरकार ने घटाया था शुल्क
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पिछले साल कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था. उस समय सरकार ने कंपनियों से कहा था कि कर में कटौती का फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए. लेकिन अब बदलते हालात को देखते हुए सरकार फिर से शुल्क बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही है.