हाई वैल्यू फसलों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी, बागवानी में काजू-अखरोट-नारियल पर किसानों का भरोसा बढ़ा
high value crops production Increase: हाई वैल्यू वाली फसलों के केंद्र में बागवानी फसलें हैं. फलों और सब्जियों से लेकर फूलों और मसाला फसलों से ग्रामीण विकास में तेज बदलाव देखा जा रहा है. कृषि विकसित भारत के विजन में मजबूत स्थान रखती है. पिछले एक दशक में इस क्षेत्र ने 4.45 फीसदी की दर से बढ़त दर्ज की है, जो पहले के दशकों की तुलना में सर्वाधिक है.
हाई वैल्यू यानी ज्यादा डिमांड वाली और ज्यादा कमाई कराने वाली फसलों के रकबे, उत्पादन में तेज बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा किसान बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. केंद्र सरकार के फसल विविधीकरण के तहत किसानों का पारंपरिक फसलें करने का रुख अब बदला है. इससे खेत की मिट्टी, पर्यावरण और किसान की कमाई में सकारात्मक सुधार के नतीजे देखे जा रहे हैं. हाई वैल्यू फसलों में बागवानी के साथ ही नारियल, काजू और अखरोट के उत्पादन और निर्यात में जोरदार बढ़त दर्ज की गई है.
कृषि विकास दर पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार हाई वैल्यू वाली फसलों में बागवानी फसलें केंद्र में हैं. फलों और सब्जियों से लेकर फूलों, मसालों और बागान फसलों तक, बागवानी ग्रामीण विकास को तेजी से बदल रही है. पारंपरिक मुख्य फसलों के विपरीत उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें प्रति इकाई भूमि पर अधिक उत्पादन देती हैं और कृषि सकल मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं. कृषि विकसित भारत के विजन में मजबूत स्थान रखती है. पिछले एक दशक में इस क्षेत्र ने 4.45 फीसदी की दर से (Agriculture Growth Rate) बढ़त दर्ज की है, जो पहले के दशकों की तुलना में सर्वाधिक है.
भारत में कृषि के विकास के प्रेरक के रूप में बागवानी
बागवानी क्षेत्र, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के कृषि फसल उपक्षेत्र के सकल मूल्य उत्पादन (जीवीओ) में लगभग 37 फीसदी योगदान देता है और भारत की कृषि विकास की दिशा में एक आधारशिला के रूप में उभरा है. पिछले एक दशक में बागवानी उत्पादन (Horticulture Production) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2013-14 में रहे 2773.5 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 3707.4 लाख टन हो गया है. इसमें फलों का उत्पादन 1176.5 लाख टन रहा है. जबकि, सब्जियों का उत्पादन 2178.0 लाख टन दर्ज किया गया है.
नारियल, काजू और अखरोट उत्पादन और निर्यात में जबरदस्त बढ़ोत्तरी
खाद्य एवं कृषि संगठन सांख्यिकीय डेटाबेस (एफएओएसटीएटी) 2024 के अनुसार भारत नारियल उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है और यह क्षेत्र लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका मजबूत करते हैं और इसमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं. साल 2024-25 में भारत का काजू निर्यात 3691.7 अमरीकी डॉलर रहा, जबकि इसी वर्ष कोको का निर्यात 295.58 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचा. इसी तरह वित्त वर्ष 2024-25 में अखरोट का निर्यात मूल्य 7.80 मिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जिसके प्रमुख बाजारों में संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की, इराक, सिंगापुर, अल्जीरिया, क़तर, भूटान, कुवैत, सेशेल्स और नाइजीरिया शामिल हैं.