बाढ़ और बारिश के बाद अब धान में लगी नई बीमारी, फसल को भारी नुकसान.. पैदावार में गिरावट

संगरूर और बरनाला के धान किसानों को भारी बारिश, ड्वार्फ वायरस और फॉल्स स्मट जैसी बीमारियों के चलते भारी नुकसान हुआ है. मलवा क्षेत्र में फसलें बर्बाद हो गई हैं. किसान सरकार से मुआवजा और राहत की मांग कर रहे हैं. कृषि विभाग नुकसान के आंकलन के लिए सर्वे कर रहा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 20 Oct, 2025 | 08:19 AM

Punjab News: पंजाब के संगरूर और बरनाला जिले के धान किसान इस बार भारी नुकसान की कगार पर हैं. मलवा क्षेत्र के इन कृषि प्रधान जिलों में लगातार हुई बारिश ने खेतों को बर्बाद कर दिया है. इससे फसलें न सिर्फ गिर गईं, बल्कि उन्हें फॉल्स स्मट, ड्वार्फ वायरस और दाने के बदरंग होने जैसी बीमारियों ने भी घेर लिया. किसानों ने अच्छी पैदावार की उम्मीद से मेहनत से धान बोया था, लेकिन अब फसल या तो सूख गई है या पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. फॉल्स स्मट एक फंगल बीमारी है जिसमें धान के फूलों की जगह पीले रंग की गेंदें बन जाती हैं, जिससे दाने खाने या बेचने लायक नहीं रहते. ड्वार्फ वायरस पौधे की बढ़त रोक देता है और बाद में पूरी तरह सुखा देता है. दानों के बदरंग होने से भी उनकी गुणवत्ता और बाजार में कीमत घट जाती है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संगरूर के शेरों गांव के किसान जरनैल सिंह ने कहा कि मेरे पास आठ एकड़ जमीन है और हर एकड़ में करीब 22 क्विंटल फसल ड्वार्फ वायरस से खराब हो गई है. अगस्त और सितंबर में भारी बारिश की वजह से फंगीसाइड और कीटनाशक  समय पर नहीं छिड़क पाए. मुझे लगभग 2 लाख रुपये की फसल का नुकसान हुआ है. सामान्य स्थिति में किसान को एक एकड़ से करीब 80,000 रुपये की आमदनी होती है, लेकिन जरनैल सिंह का कहना है कि बीमारियों से हुई फसल के नुकसान पर सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती.

इस साल पैदावार पिछले सालों की तुलना में काफी कम

संगरूर के लिड्डरां गांव के गुरप्रीत सिंह ने कहा कि इस साल पैदावार  पिछले सालों की तुलना में काफी कम है. उन्होंने कहा कि हर किसान परेशान है, हम बस इसी की बात करते हैं. फसल को बचाने के खर्चे तो बहुत हैं, लेकिन आमदनी कभी तय नहीं होती. जिन किसानों ने जमीन ठेके पर ली है, उनके लिए हालात और भी मुश्किल हैं. नडामपुर गांव के कुलविंदर सिंह ने कहा कि धान की औसत पैदावार 35-40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है, लेकिन इस बार ये घटकर 20-25 क्विंटल रह गई है. ठेके पर जमीन लेने वाले किसान बहुत तनाव में हैं. सरकार को जरूर दखल देना चाहिए.

40 फीसदी पैदावार का नुकसान हो चुका है

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहाण) के अध्यक्ष, जोगिंदर सिंह उग्रहाण ने कहा कि मलवा क्षेत्र में लगभग 40 फीसदी पैदावार का नुकसान हो चुका है और कुल गिरावट करीब 25 फीसदी तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि खराब बीज गुणवत्ता भी फसल के बौना रहने की एक बड़ी वजह है. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को किसानों के लिए मुआवजा, सब्सिडी और ब्याज  में छूट की घोषणा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसान पहले ही बाढ़ जैसी मुसीबत झेल चुके हैं, और अब ये नया संकट बेहद तकलीफदेह है.

PR 131 धान की किस्म पर ज्यादा वायरस का असर

सुनाम के कृषि विकास अधिकारी नरिंदरपाल सिंह ने कहा  कि ड्वार्फ वायरस का असर खासतौर पर PR 131 और PUSA 44 धान  की किस्मों में ज्यादा दिखा है. पंजाब के अन्य हिस्सों में भी PR किस्मों में इसी तरह की समस्या देखी गई है. उन्होंने कहा कि मेरे अनुभव में इस बार जैसी भारी गिरावट मैंने पहले कभी नहीं देखी. असली नुकसान का आंकलन तब होगा जब कटाई आधे से ज्यादा पूरी हो जाएगी. पंजाब के कृषि निदेशक जसवंत सिंह ने कहा कि विभाग की फसल कटाई सर्वेक्षण प्रक्रिया चल रही है, जिससे पूरी स्थिति साफ हो सकेगी.

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