युद्ध के बीच भी नहीं रुकी खाद सप्लाई! भारत ने कई देशों से मंगाया यूरिया-डीएपी, भरपूर स्टॉक का दावा
Fertilizer Stock: पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के बावजूद भारत ने किसानों के लिए खाद की आपूर्ति बनाए रखी. अप्रैल से जून 2026 के बीच देश ने कई देशों से 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात किया. सरकार के अनुसार, खरीफ सीजन के दौरान जरूरत से अधिक खाद उपलब्ध रही.
Urea Import India: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था. ऐसे में दुनिया भर में खाद की सप्लाई को लेकर भी चिंता जताई जा रही थी. लेकिन भारत ने समय रहते कदम उठाकर किसानों के लिए यूरिया और डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी. केंद्र सरकार ने कई देशों से खाद का आयात बढ़ाया, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ा.
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में बताया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच भारत ने कई देशों से यूरिया और डीएपी का आयात किया. इसके साथ ही देश में जरूरत से अधिक खाद उपलब्ध कराई गई, ताकि खेती का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
कई देशों से मंगाई गई यूरिया और डीएपी
सरकार के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत ने लगभग 15.08 लाख टन यूरिया और 7.11 लाख टन डीएपी का आयात किया. यूरिया की खरीद ओमान, कतर, सऊदी अरब, रूस, अमेरिका, वियतनाम, तुर्की, मलेशिया, फिनलैंड, अल्जीरिया, मिस्र, जॉर्जिया और नाइजीरिया समेत कई देशों से की गई. वहीं डीएपी का आयात मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, चीन, अमेरिका, मिस्र और अल्जीरिया जैसे देशों से किया गया. सरकार का कहना है कि, अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाने का मकसद किसी एक देश पर निर्भरता कम करना और किसानों तक समय पर खाद पहुंचाना था.
जून में सबसे ज्यादा हुई खरीद
अप्रैल और मई की तुलना में जून महीने में खाद का आयात काफी बढ़ गया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 5.83 लाख टन यूरिया और 49 हजार टन डीएपी आयात किया गया. मई में 4.10 लाख टन यूरिया और 1.32 लाख टन डीएपी की खरीद हुई. वहीं खरीफ सीजन की जरूरत को देखते हुए जून में यूरिया और डीएपी दोनों का आयात तेज कर दिया गया. जून के दौरान अल्जीरिया, रूस, मिस्र, नाइजीरिया, जॉर्जिया और सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में यूरिया मंगाया गया. वहीं डीएपी के लिए भी कई नए देशों से खरीद की गई, ताकि सप्लाई प्रभावित न हो.
चीन से सीमित रही खरीद
सरकार ने बताया कि चीन ने अपनी घरेलू जरूरतों को देखते हुए यूरिया के निर्यात पर रोक जैसी सख्ती की थी. इसी वजह से भारत ने चीन से बहुत सीमित मात्रा में खाद खरीदी. चीन से अप्रैल में केवल 29 हजार टन यूरिया और जुलाई में 45 हजार टन डीएपी का आयात हुआ. वहीं अमेरिका से भी केवल जुलाई में 60 हजार टन डीएपी खरीदा गया. इस दौरान भारत ने दूसरे देशों से खरीद बढ़ाकर खाद की उपलब्धता बनाए रखी.
देश में जरूरत से ज्यादा रहा खाद का स्टॉक
- सरकार ने संसद में बताया कि 1 अप्रैल 2026 को देश में 54.22 लाख टन यूरिया और 20.93 लाख टन डीएपी का शुरुआती स्टॉक मौजूद था.
- अप्रैल से 29 जुलाई 2026 तक देश में यूरिया की जरूरत 122.84 लाख टन और डीएपी की जरूरत 35.44 लाख टन रही.
- इसके मुकाबले 177.28 लाख टन यूरिया और 43.03 लाख टन डीएपी उपलब्ध कराया गया.
किसानों तक लगातार पहुंची खाद
सरकार के मुताबिक, अप्रैल से जुलाई के बीच डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के जरिए 112.53 लाख टन यूरिया और 26.59 लाख टन डीएपी किसानों को बेची गई. 29 जुलाई तक भी देश में 64.75 लाख टन यूरिया, 16.44 लाख टन डीएपी और 21.21 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का स्टॉक उपलब्ध था. इसके अलावा खरीफ सीजन में जून तक देश में 71.55 लाख टन यूरिया और 9.84 लाख टन डीएपी का घरेलू उत्पादन भी किया गया.
किसानों को नहीं होगी खाद की चिंता
सरकार का कहना है कि, अंतरराष्ट्रीय हालात चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद खाद की आपूर्ति प्रभावित नहीं होने दी गई. आयात बढ़ाने, घरेलू उत्पादन जारी रखने और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की रणनीति से खरीफ सीजन में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई गई. इससे खेती के काम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और आने वाले समय में भी खाद की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास जारी रहेंगे.