हरियाणा में समय से पहले धान रोपाई पर सख्ती, किसानों को कृषि विभाग ने भेजे नोटिस

हरियाणा में भूजल संरक्षण अधिनियम 2009 लागू है. इस कानून के तहत 15 मई से पहले धान की नर्सरी तैयार करना और 15 जून से पहले धान की रोपाई करना प्रतिबंधित है. सरकार का मानना है कि अगर किसान समय से पहले धान की रोपाई करते हैं तो खेतों में ज्यादा समय तक पानी देना पड़ता है, जिससे भूमिगत जल तेजी से कम होता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 23 May, 2026 | 02:22 PM

Yamunanagar farmers notice: हरियाणा में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए सरकार अब और सख्त होती दिखाई दे रही है. यमुनानगर जिले में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने उन किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है जिन्होंने तय तारीख से पहले धान की रोपाई कर दी. विभाग ने कई किसानों को नोटिस जारी कर पांच दिन के भीतर अवैध तरीके से लगाई गई धान की फसल खुद नष्ट करने के निर्देश दिए हैं.

राज्य सरकार और कृषि विभाग का कहना है कि समय से पहले धान की खेती करने से भूजल का तेजी से दोहन होता है, जिससे आने वाले वर्षों में पानी का संकट और गहरा सकता है. यही वजह है कि हरियाणा में भूजल संरक्षण कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है.

गांवों में पहुंची कृषि विभाग की टीम

द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, शुक्रवार को कृषि विभाग की टीम ने यमुनानगर के नाहरपुर गांव में खेतों का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई किसानों ने तय समय से पहले ही धान की रोपाई शुरू कर दी है.

जगाधरी के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. अजय नरवाल और ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने खेतों का दौरा किया. जांच में पांच किसान ऐसे मिले जिन्होंने करीब 13 एकड़ जमीन पर समय से पहले धान की रोपाई कर दी थी. इसके बाद विभाग ने इन किसानों को नोटिस जारी कर नियमों की जानकारी दी और पांच दिन के भीतर फसल हटाने को कहा.

क्या कहता है हरियाणा का कानून?

हरियाणा में भूजल संरक्षण अधिनियम 2009 लागू है. इस कानून के तहत 15 मई से पहले धान की नर्सरी तैयार करना और 15 जून से पहले धान की रोपाई करना प्रतिबंधित है.

सरकार का मानना है कि अगर किसान समय से पहले धान की रोपाई करते हैं तो खेतों में ज्यादा समय तक पानी देना पड़ता है, जिससे भूमिगत जल तेजी से कम होता है. हरियाणा के कई जिलों में पहले ही भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका है.

विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है. ऐसे में समय से पहले खेती शुरू होने से बिजली और पानी दोनों की खपत बढ़ जाती है.

किसानों को दी गई चेतावनी

यमुनानगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डाबस ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे 15 जून से पहले धान की रोपाई न करें और सरकार के भूजल संरक्षण अभियान में सहयोग दें. अधिकारियों के मुताबिक अगर नोटिस मिलने के बाद भी किसान फसल नहीं हटाते तो प्रशासन आगे कानूनी कार्रवाई कर सकता है.

क्यों बढ़ रही है पानी की चिंता?

हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले कुछ वर्षों से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है. धान की खेती में लगातार ट्यूबवेल से पानी निकालने के कारण कई इलाकों में पानी का स्तर हर साल नीचे जा रहा है. इस बार गर्मी भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है. कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है. तेज गर्मी के कारण पानी की मांग और बढ़ गई है. ऐसे में सरकार पानी बचाने के लिए खेती के नियमों को सख्ती से लागू कर रही है.

किसानों की बढ़ी चिंता

कई किसान मानते हैं कि समय से पहले धान लगाने से फसल जल्दी तैयार हो जाती है और उन्हें बाजार में फायदा मिल सकता है. लेकिन सरकार का कहना है कि लंबे समय में यह तरीका नुकसानदायक साबित होगा. विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को धान के अलावा कम पानी वाली फसलों की तरफ भी बढ़ना चाहिए. साथ ही ड्रिप सिंचाई और नई तकनीकों को अपनाकर पानी की बचत की जा सकती है.

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