Mango-Litchi Fruit Cracking: उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में आम और लीची की खेती किसानों की आय का मुख्य साधन है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ी समस्या तेजी से बढ़ी है फलों का फटना (Fruit Cracking). यह समस्या न केवल उत्पादन घटाती है, बल्कि फलों की गुणवत्ता को भी खराब कर देती है, जिससे बाजार में सही दाम नहीं मिल पाता. अगर इस समस्या को समय रहते समझकर सही उपाय अपनाए जाएं, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) से बातचीत में कहा कि, अगर किसान इस समय वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करें, तो फलों का फटना कम हो सकता है.
क्या है फलों के फटने की समस्या?
फल विदारण (फलों का फटना) एक शारीरिक विकार है, जिसमें फल का बाहरी छिलका अचानक फट जाता है. आम में यह समस्या पकने के समय अधिक दिखाई देती है, जबकि लीची में यह अंतिम विकास चरण में होती है. इससे फल देखने में खराब हो जाता है और बाजार में उसकी कीमत कम हो जाती है.
फलों के फटने के मुख्य कारण
- जलवायु परिवर्तन का असर: आजकल मौसम तेजी से बदल रहा है, जिससे दिन में तेज गर्मी और रात में ठंडक महसूस हो रही है. साथ ही अचानक होने वाली बारिश किसानों और आम लोगों के लिए नई परेशानी खड़ी कर रही है.
- असंतुलित सिंचाई: अगर लंबे समय तक सूखा रहे और फिर अचानक ज्यादा पानी मिल जाए, तो फल के अंदर तेजी से विकास होता है, लेकिन बाहरी छिलका उतनी तेजी से नहीं फैल पाता. इससे फल फट जाता है.
- पोषक तत्वों की कमी: कैल्शियम और बोरॉन की कमी होने पर फलों की त्वचा कमजोर हो जाती है, जिससे उनके फटने का खतरा बढ़ जाता है. कैल्शियम छिलके को मजबूत बनाता है, जबकि बोरॉन उसकी लचक बढ़ाकर फल को सुरक्षित रखने में मदद करता है.
- हार्मोनल असंतुलन: पौधों में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से भी फलों का विकास असमान हो जाता है, जिससे फटने की संभावना बढ़ जाती है.
- अधिक नाइट्रोजन का उपयोग: अधिक नाइट्रोजन देने से फल तेजी से बढ़ता है, लेकिन उसका छिलका पतला रह जाता है और आसानी से फट सकता है.
फलों के फटने से नुकसान
- 20 से 60% तक उत्पादन कम हो सकता है
- फलों की गुणवत्ता गिर जाती है
- निर्यात के लिए फल अनुपयोगी हो जाते हैं
- किसानों को आर्थिक नुकसान होता है
फलों को फटने से बचाने के आसान उपाय
फल फटने की समस्या से बचाव के लिए सही खेती प्रबंधन बेहद जरूरी है.
- सबसे पहले सिंचाई पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें मिट्टी की नमी को संतुलित बनाए रखना, ड्रिप सिंचाई अपनाना और नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करना शामिल है. खास तौर पर सूखे के बाद अचानक अधिक पानी देने से बचना चाहिए. इससे फल फटने की संभावना बढ़ती है.
- इसके साथ ही मल्चिंग का उपयोग भी काफी फायदेमंद होता है. पेड़ों के आसपास भूसा या पुआल बिछाने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, तापमान नियंत्रित रहता है और खरपतवार भी कम उगते हैं.
- पोषक तत्वों का सही संतुलन भी जरूरी है, जैसे कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव, समय-समय पर बोरॉन का स्प्रे और पोटाश की पर्याप्त मात्रा देना. ये तत्व फल की त्वचा को मजबूत बनाते हैं. (सलाह:15 अप्रैल से पहले बोरॉन का छिड़काव ज्यादा असरदार पाया गया है.)
- इसके अलावा एंटी-क्रैकिंग उपाय जैसे कैल्शियम क्लोराइड स्प्रे, सिलिकॉन आधारित घोल और संतुलित हार्मोन स्प्रे भी प्रभावी साबित होते हैं.
- तापमान नियंत्रण के लिए शेड नेट का उपयोग करना, पेड़ों के आसपास हवा को रोकने वाले पेड़ लगाना और गर्मी के समय हल्की सिंचाई करना उपयोगी रहता है.
अंत में, सही समय पर तुड़ाई भी बहुत महत्वपूर्ण है. फल को अधिक पकने से पहले तोड़ लेना चाहिए और तुड़ाई सुबह या शाम के समय करने से गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.