जहरीले चावल ने ली 25 गिद्धों की जान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा

लखीमपुर खीरी में 25 हिमालयन ग्रिफॉन गिद्धों की मौत मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. जांच में जहरीले कीटनाशक की पुष्टि हुई है. बताया गया कि जहरीला चावल खाने वाले कुत्तों के शव खाने से गिद्धों की जान गई. घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 May, 2026 | 06:18 PM

Vulture Death: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 25 हिमालयन ग्रिफॉन गिद्धों की सामूहिक मौत के मामले में पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि गिद्धों की मौत कार्बोफ्यूरान नाम के जहरीले कीटनाशक के कारण हुई. बताया जा रहा है कि आवारा कुत्तों को मारने के लिए खेतों में जहरीला चावल रखा गया था. उन कुत्तों के शव खाने के बाद गिद्ध भी जहर की चपेट में आ गए. इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

खेत में बिछ गईं गिद्धों की लाशें, गांव में मचा हड़कंप

यह घटना भीरा वन रेंज के पास स्थित एक गांव के खेतों में सामने आई थी. ग्रामीणों ने खेतों में बड़ी संख्या में गिद्धों को मृत हालत में देखा तो इलाके में हड़कंप मच गया. मौके पर 25 गिद्धों और दो आवारा कुत्तों के शव मिले थे, जबकि पांच गिद्ध गंभीर हालत में बताए गए. ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कुछ आवारा कुत्तों की अचानक मौत हो गई थी. बदबू और संक्रमण फैलने के डर से उनके शव खेतों में फेंक दिए गए. कुछ लोगों ने दावा किया कि कुत्तों को मारने के लिए पके हुए चावल में जहरीला कीटनाशक मिलाया गया था. दोपहर के समय गिद्धों का झुंड खेत में पहुंचा और कुत्तों के शव खाने लगा. लेकिन थोड़ी ही देर बाद गिद्ध एक-एक कर जमीन पर गिरने लगे. देखते ही देखते पूरा खेत गिद्धों की लाशों से भर गया. ग्रामीणों ने बताया कि कई सालों बाद इतनी बड़ी संख्या में गिद्ध दिखाई दिए थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह खुशी दर्दनाक हादसे में बदल गई.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कार्बोफ्यूरान की पुष्टि

शनिवार को सामने आई इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में बताया गया कि गिद्धों और कुत्तों की मौत ‘कार्बोफ्यूरान’ नाम के जहरीले सिस्टमिक कीटनाशक से हुई. यह रसायन बेहद खतरनाक माना जाता है और पौधों के ऊतकों तक फैल जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह जहर शरीर के तंत्रिका तंत्र पर सीधा असर डालता है. एक बार शरीर में पहुंचने के बाद यह तेजी से जानलेवा साबित हो सकता है. जांच में पता चला कि कुत्तों ने कार्बोफ्यूरान मिला हुआ चावल खाया था. बाद में उन्हीं कुत्तों के शव खाने से गिद्ध भी जहर की चपेट में आ गए. वन अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए भी बेहद खतरनाक साबित होता है.

गिद्धों की घटती संख्या से बढ़ी चिंता

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध पहले से ही संकट का सामना कर रहे हैं. ऐसे में एक साथ 25 गिद्धों की मौत पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा नुकसान माना जा रहा है. गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाते हैं. ये मृत जानवरों को खाकर वातावरण को साफ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. अगर इनकी संख्या लगातार घटती रही तो बीमारियों और संक्रमण का खतरा बढ़  सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में जहरीले रसायनों का गलत इस्तेमाल सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पक्षियों और दूसरे जानवरों पर भी पड़ता है. यही वजह है कि अब इस घटना को वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है.

जांच तेज, दोषियों पर होगी कार्रवाई

घटना के बाद वन विभाग ने मामले की जांच तेज कर दी है. अधिकारियों ने बताया कि विसरा जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि खेतों में जहरीला चावल किसने रखा था और इसके पीछे क्या मकसद था. वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है. विशेषज्ञों ने किसानों और ग्रामीणों से अपील  की है कि जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करें. आवारा जानवरों को मारने के लिए ऐसे जहरीले पदार्थों का उपयोग पूरे पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

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