तेलंगाना में एक हफ्ते में 500 से ज्यादा कुत्तों का कत्लेआम, एक वादा बना मौत की वजह

पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें पांच गांवों के सरपंच और एक अन्य व्यक्ति शामिल है, जिस पर कुत्तों को मारने का काम सौंपे जाने का आरोप है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुत्तों के शव गांवों के बाहर दफना दिए गए थे.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 14 Jan, 2026 | 11:45 AM

Telangana stray dog killing: तेलंगाना से सामने आई यह खबर न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि इंसानियत और लोकतंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. गांवों में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के नाम पर जो किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक कहा जा सकता है. बीते एक हफ्ते में अलग-अलग गांवों में करीब 500 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार देने के आरोप सामने आए हैं. हैरानी की बात यह है कि यह सब कथित तौर पर पंचायत चुनावों में किए गए वादों को पूरा करने के लिए किया गया.

चुनावी वादों की कीमत जानवरों की जान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में हाल में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कुछ उम्मीदवारों ने गांवों में बढ़ते आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से “सख्ती से निपटने” का वादा किया था. चुनाव जीतने के बाद उसी वादे को पूरा करने के नाम पर यह अमानवीय तरीका अपनाया गया. कामारेड्डी जिले के भवानीपेट, पलवांचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली जैसे गांवों में कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन दिए जाने की बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि सिर्फ दो-तीन दिनों में ही करीब 200 कुत्तों की जान चली गई, खबरों के अनुसार हफ्तेभर में 500 से ज्या कुत्तों को मारने की बात कही जा रही है.

पशु प्रेमी की शिकायत से खुला मामला

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पशु कल्याण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता अदुलापुरम गौतम ने 12 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि उन्हें दोपहर के समय भरोसेमंद जानकारी मिली थी कि गांवों में बड़े पैमाने पर कुत्तों को मारा जा रहा है. जब वे शाम को एक दोस्त के साथ भवानीपेट पहुंचे, तो मंदिर के पास कई कुत्तों के शव पड़े मिले. यह दृश्य देखकर वे स्तब्ध रह गए. गौतम ने इसे जानबूझकर की गई क्रूरता बताया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

सरपंचों पर गंभीर आरोप, पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें पांच गांवों के सरपंच और एक अन्य व्यक्ति शामिल है, जिस पर कुत्तों को मारने का काम सौंपे जाने का आरोप है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुत्तों के शव गांवों के बाहर दफना दिए गए थे, जिन्हें बाद में पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. विसरा के सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं, ताकि यह साफ हो सके कि किस जहर का इस्तेमाल किया गया.

कानून और इंसानियत पर उठे सवाल

यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सोच का भी है. आवारा जानवरों की समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका समाधान हिंसा और हत्या नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट और पशु कल्याण कानून पहले से ही स्पष्ट हैं कि आवारा कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार अपराध है. इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों पर ऐसे आरोप लगना बेहद गंभीर है.

गांवों में डर और नाराजगी का माहौल

इन घटनाओं के बाद गांवों में माहौल तनावपूर्ण है. एक तरफ कुछ लोग आवारा कुत्तों से परेशान थे, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण इस क्रूरता से आहत भी हैं. पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो इससे गलत संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसे मामले बढ़ सकते हैं.

तेलंगाना की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या चुनावी वादों को निभाने के लिए किसी भी हद तक जाना सही है. विकास, सुरक्षा और समस्या समाधान के नाम पर हिंसा को जायज ठहराया जाना न तो कानून स्वीकार करता है और न ही इंसानियत. अब सबकी निगाहें जांच और आने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है