Delhi News: दिल्ली की सड़कों पर घूमते आवारा कुत्ते और गाय लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं. कभी सड़क हादसे, तो कभी सफाई और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें-इन सबके बीच अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी ने आवारा जानवरों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए माइक्रोचिप योजना शुरू करने का फैसला किया है, जिस पर अगले चार साल में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे.
आवारा कुत्तों में लगेगी माइक्रोचिप, बढ़ेगी जवाबदेही
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एमसीडी ने तय किया है कि अब आवारा कुत्तों के बंध्याकरण (नसबंदी) के दौरान उनके शरीर में माइक्रोचिप लगाई जाएगी. इस माइक्रोचिप में कुत्ते से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होगी-कहां से पकड़ा गया, कब बंध्याकरण हुआ और किस केंद्र पर किया गया. एक कुत्ते पर माइक्रोचिप लगाने में करीब 300 रुपये खर्च होंगे. चार साल तक चलने वाली इस योजना पर लगभग 48 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. एमसीडी इस साल 1.20 लाख आवारा कुत्तों के बंध्याकरण का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके लिए मौजूदा केंद्रों में अतिरिक्त कैनल बनाई जाएंगी, ताकि काम तेजी से हो सके.
द्वारका में बनेगा पहला बड़ा डॉग शेल्टर
आवारा और खतरनाक कुत्तों को सुरक्षित रखने के लिए एमसीडी द्वारका सेक्टर-29 में 1500 कुत्तों की क्षमता वाला आधुनिक डॉग शेल्टर बना रही है. यह एमसीडी का पहला बड़ा डॉग शेल्टर होगा. इस शेल्टर को चलाने में हर साल करीब 6.50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यहां बीमार, आक्रामक और इलाज की जरूरत वाले कुत्तों को अलग रखा जाएगा, जिससे आम लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे और जानवरों की देखभाल भी सही ढंग से हो सके.
अब गायों पर भी लगेगी माइक्रोचिप
एमसीडी ने पहली बार छूटा पशुओं (गाय) के लिए भी माइक्रोचिप लगाने का फैसला किया है. अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि सड़कों से उठाई गई गायों को माफिया चोर रास्ते से गौशालाओं से छुड़ा लेता है और फिर वे वापस सड़कों पर आ जाती हैं. अब जब भी गाय को सड़क से उठाकर गौशाला भेजा जाएगा, उसे माइक्रोचिप लगाई जाएगी. इसमें यह दर्ज होगा कि गाय कहां से उठाई गई, कब उठाई गई और किस गौशाला में रखी गई. इससे गायों की ट्रैकिंग आसान होगी और उन्हें दोबारा सड़कों पर छोड़ना मुश्किल हो जाएगा.
बजट बैठक में पार्षदों ने रखीं कई अहम मांगें
स्थायी समिति की बैठक में अलग-अलग समितियों के चेयरमैन और पार्षदों ने कई सुझाव रखे. निर्माण समिति की चेयरपर्सन प्रीति ने पार्षदों को विकास कार्यों के लिए दो करोड़ रुपये देने की मांग की. वहीं पर्यावरण प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने हर वार्ड में एक बुलडोजर, स्वीपिंग मशीन और अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की मांग की. शिक्षा समिति के चेयरमैन योगेश वर्मा ने एमसीडी स्कूलों में खाली जगह पर एटीएम लगाने का सुझाव दिया, ताकि निगम को अतिरिक्त आय हो सके. ग्रामीण विकास समिति ने गांवों के लिए अलग फंड, बेहतर स्ट्रीट लाइट और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी मांग रखी.