भारत में इथेनॉल क्रांति ESY 2024-25 में मक्का मुख्य फीडस्टॉक के तौर पर उभरा है और कुल इथेनॉल सप्लाई का लगभग 50 फीसदी हिस्सा मक्का का है. इसके साथ ही इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना की निर्भरता बहुत कम हो गई है. गन्ना के शीरा, गुड़ से बनने वाला इथेनॉल 321 करोड़ लीटर है और मक्का से बना इथेनॉल 498 करोड़ लीटर के पार पहुंच गया है. देश का कुल सालाना इथेनॉल उत्पादन 1,039 करोड़ लीटर के पार पहुंच गया है.
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने देश के बायोफ्यूल लैंडस्केप में एक बड़े बदलाव का खुलास करते हुए बताया है कि मौजूदा इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2024-25 में मक्का ने आधिकारिक तौर पर पारंपरिक फीडस्टॉक्स को पीछे छोड़ दिया है और भारत के इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम का मुख्य ड्राइवर बन गया है, जो खेती में अलग-अलग तरह के इस्तेमाल और एनर्जी सिक्योरिटी के एक नए दौर का संकेत है.
इथेनॉल का उत्पादन 1,039 करोड़ लीटर के पार
भारत का इथेनॉल सप्लाई प्रोग्राम लगातार अच्छी रफ्तार दिखा रहा है. इथेनॉल का कुल उत्पादन लगभग 1,039 करोड़ लीटर के पार पहुंच गया है. डेटा से पता चलता है कि अनाज से बने फीडस्टॉक्स की हिस्सेदारी 718 करोड़ लीटर रही है, जो कुल सप्लाई किए गए इथेनॉल का लगभग 69 फीसदी है, जबकि गन्ने से बने फीडस्टॉक्स की हिस्सेदारी 321 करोड़ लीटर है.
मक्का बायोफ्यूल का नया पॉवरहाउस
AIDA के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक मक्का अब कुल इथेनॉल सप्लाई में 48% से 51% तक का योगदान देता है. यह पिछले सालों से एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है, जब गन्ने से बने फीडस्टॉक्स का मार्केट पर दबदबा था. मौजूदा साइकिल के लिए दिए गए कुल इथेनॉल में से मक्का से बने प्रोडक्शन में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, जिसे अच्छी सरकारी पॉलिसी और बढ़ी हुई खरीद कीमतों का सपोर्ट मिला है. बता दें कि मक्का से बने इथेनॉल के लिए 71.86 रुपये प्रति लीटर है.
मुख्य डेटा एनालिसिस (ESY 2024-25):
- अनाज का दबदबा: मक्का दूसरे फीडस्टॉक्स को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा फीडस्टॉक बन गया है.
- अलग-अलग तरह का फीडस्टॉक मिक्स: मक्का ~48% के साथ सबसे आगे है, बाकी सप्लाई टूटे हुए चावल, खराब अनाज, गुड़ और दूसरी चीजों से बैलेंस होती है.
- कैपेसिटी बढ़ाना: इंडस्ट्री की अब कुल कैपेसिटी लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें 380 से ज्यादा खास डिस्टिलरी चालू हैं और 33 और पाइपलाइन में हैं.
- ब्लेंडिंग में सफलता: भारत ने 2025 में 20% ब्लेंडिंग का टारगेट पहले ही हासिल कर लिया है.
मक्का उगाने वाले किसानों को भी बहुत बढ़ावा मिला
AIDA के प्रेसिडेंट विजेंद्र सिंह ने कहा कि “लेटेस्ट इथेनॉल सप्लाई डेटा भारत के बायोफ्यूल इकोसिस्टम की बढ़ती मैच्योरिटी और लचीलेपन को दिखाता है. मक्का और दूसरे अनाज-बेस्ड फीडस्टॉक्स का बढ़ता योगदान सप्लाई स्टेबिलिटी को मजबूत कर रहा है, साथ ही किसी एक सोर्स पर निर्भरता कम कर रहा है. अब जब मक्का हमारे फीडस्टॉक का लगभग 50% हिस्सा है, तो हमने इथेनॉल प्रोडक्शन को शुगर साइकिल से सफलतापूर्वक अलग कर दिया है. इससे न केवल पूरे साल बायोफ्यूल की सप्लाई सुनिश्चित होती है, बल्कि देश भर में मक्का उगाने वाले किसानों को भी बहुत बढ़ावा मिलता है.