धरती को बचाने के लिए पेड़ जरूरी, कृषि मंत्रालय के सभी कार्यक्रम पौधारोपण से शुरू होंगे  

कृषि मंत्री ने कहा कि अब वे अपने स्वागत में फूल-मालाएं, पटका या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे. पांच सौ रुपये के स्मृति चिन्ह की जगह पांच पौधे लगाएं और उसकी फोटो उन्हें भेंट करें. उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े के पटके या माला का बाद में कोई उपयोग नहीं होता, जबकि उसी खर्च में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायी धरोहर बन जाते हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 19 Feb, 2026 | 05:30 PM

धरती को बचाने के लिए पेड़ों की जरूरत है. पर्यावरण संरक्षण से ही खेती को मजबूती मिलेगी. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर दिन एक पौधा कार्यक्रम के 5 साल होने पर कहा कि अब कृषि मंत्रालय के हर कार्यक्रम की शुरुआत पौधा लगाने के साथ होगी. इसके साथ ही ग्रामीण विकास विभाग के सभी कार्यक्रम पौधारोपण से शुरू होंगे. स्वागत में स्मृति चिन्ह नहीं, पेड़ लगाकर फोटो देने का नया संकल्प लेने का आह्वान किया है. पेड़ बैंक और ‘अंकुर’ जैसे मंच के जरिए देशव्यापी पौधारोपण महाअभियान शुरू करने के निर्देश दिए.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान पूसा में कहा कि अब विभागों के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधारोपण से करने का निर्देश देने के साथ ही स्वागत में स्मृति चिन्ह के स्थान पर पेड़ लगाकर फोटो भेंट करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम कर्मकांड या व्यक्तिगत महिमामंडन के लिए नहीं, बल्कि अभियान को व्यापक फलक देने के लिए है.

  • कृषि मंत्रालय के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अब पौधारोपण से होगी.
  • आईसीएआर के डीजी से उन्होंने कहा- आईसीएआर के अधीन हर कार्यक्रम, सेमिनार, सम्मेलन व समारोह पेड़ लगाकर ही शुरू होंगे.
  • कृषि विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पहले पेड़ लगाए जाएंगे और विद्यार्थियों से संकल्प दिलवाया जाएगा कि वे जीवनभर अपने जन्मदिन पर पौधा लगाएंगे.
  • केवीके, एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च से जुड़े किसी भी आयोजन में पेड़ लगाना शुरुआती अनिवार्य कदम होगा.
  • उन्होंने कहा कि जब कृषि विभाग जैसा बड़ा तंत्र अपने हर कार्यक्रम का श्रीगणेश पेड़ लगाकर करेगा तो सहज ही बड़ी संख्या में पौधे लगते चले जाएंगे और इससे बेहतर श्रीगणेश किसी कार्यक्रम का हो ही नहीं सकता.

5 साल में 6 हजार पौधे लगाए

अमरकंटक में नर्मदा जयंती (19 फरवरी 2021) के दिन नर्मदा तट पर “रूद्राक्ष” और “साल” के पौधे रोपकर शिवराज सिंह चौहान ने यह संकल्प लिया था कि वे प्रतिदिन कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएंगे, जिसे उन्होंने पांच वर्ष से बिना रुके निभाया है और इस दौरान 6,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं. कोविड-19 महामारी के कठिन समय से लेकर मुख्यमंत्री और अब केंद्रीय मंत्री के व्यस्त सार्वजनिक जीवन, देश-विदेश यात्राओं – किसी भी परिस्थिति में यह क्रम नहीं टूटा और पौधारोपण उनकी दैनिक दिनचर्या व पर्यावरण संदेश का स्थायी हिस्सा बना रहा. कृषि मंत्री ने कहा कि 2017 में उनके नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिसने नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को जनआंदोलन में बदल दिया.

स्मृति चिन्ह बंद, “पेड़ लगाकर फोटो भेजो”: सम्मान की नई परंपरा

कृषि मंत्री ने कहा कि अब वे अपने स्वागत में फूल-मालाएं, पटका या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अक्सर सम्मान व्यक्ति से अधिक पद का होता है और पद समाप्त होने पर वही भीड़ गायब हो जाती है; इसलिए इस भ्रम से बाहर निकलना आवश्यक है. किसी भी संस्था या व्यक्ति को यदि उनका स्वागत करना है, तो वह पांच सौ रुपये के स्मृति चिन्ह की जगह पांच पौधे लगाएं और उसकी फोटो उन्हें भेंट करें – वही उनके लिए सच्चा अभिनंदन होगा. उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े के पटके या माला का बाद में कोई उपयोग नहीं होता, जबकि उसी खर्च में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायी धरोहर बन जाते हैं.

पेड़ बैंक और ‘अंकुर’ मंच और मिस्ड कॉल व्यवस्था

कृषि मंत्री ने पेड़ बैंक की अवधारणा रखी, जिसके तहत दानदाता या संस्थाएं बड़ी संख्या में पौधे खरीदने के लिए धन दे सकें. समर्पित संस्था गड्ढा खोदने, पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले, ताकि जिनके पास समय नहीं है, वे भी दान के माध्यम से पौधारोपण में भागीदार बन सकें. उन्होंने सुझाव दिया कि एक राष्ट्रीय मंच बनाया जाए, जिसका नाम “संभावना” या “अंकुर” हो सकता है, जहां नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों की वर्षगांठ, किसी प्रियजन की जयंती या पुण्यतिथि पर पौधा लगाने या लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें. महानगरों में रहने वाले लोग तय राशि (जैसे ₹100–₹150) देकर अपने नाम से पेड़ लगवा सकें, और बदले में उन्हें उस पेड़ की फोटो और स्थान की जानकारी भेजी जाए. अभियान में जुड़ने के इच्छुक नागरिकों के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर तय किया जाए. जो भी नागरिक इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें या संदेश भेजें, उनके लिए आगे चलकर विशेष कार्यक्रम, सामूहिक पौधारोपण और प्रशिक्षण जैसी गतिविधिया.

वृक्षारोपण धर्म, संस्कृति और धरती की रक्षा का सच्चा यज्ञ 

साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि पेड़ केवल हरियाली नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और धरती–तीनों की रक्षा का माध्यम हैं. पेड़ हमारे शास्त्रीय प्रतीकों, देववृक्षों और मातृभूमि की जीवंत अभिव्यक्ति हैं. जब कोई व्यक्ति या परिवार जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, गृहप्रवेश या अन्य शुभ अवसरों पर पौधा लगाता है, तो वह केवल पेड़ नहीं, बल्कि पीढ़ियों के लिए पुण्य व संरक्षण का बीज भी बोता है. वहीं, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने को प्रकृति का अभिन्न अंग मानते हुए प्रतिदिन पौधा लगाने जैसा व्रत निभाता है, उसने एक प्रकार से “जीते-जी मोक्ष” का मार्ग अपनाया है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

आम में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला विटामिन कौन सा है?