Donkey Farming: गांवों में पशुपालन हमेशा से कमाई का भरोसेमंद जरिया रहा है. गाय-भैंस और बकरी पालन के साथ अब गधा पालन भी धीरे-धीरे एक छोटे लेकिन मजबूत व्यवसाय के रूप में सामने आ रहा है. कम खर्च, आसान देखभाल और कई तरह के कामों में उपयोग के कारण गधा पालन ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा साधन बन सकता है. अगर सही नस्ल का चुनाव किया जाए, तो यह काम और भी फायदेमंद हो सकता है.
गांवों में आज भी काम के साथी हैं गधे
पुराने समय से किसान और पशुपालक सामान ढोने के लिए गधों का इस्तेमाल करते आए हैं. आज भी कई गांवों में खेत से घर तक अनाज, लकड़ी या अन्य सामान लाने-ले जाने में गधों की मदद ली जाती है. ईंट भट्टों, निर्माण कार्य और खेती से जुड़े कामों में भी गधों की जरूरत बनी रहती है. कुछ जगहों पर गधी के दूध की मांग भी बढ़ रही है. ऐसे में गधा पालन छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए कम लागत में शुरू होने वाला एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है.
हलारी नस्ल गर्म इलाकों के लिए बेहतर
गधा पालन शुरू करने से पहले सही नस्ल चुनना बहुत जरूरी है. हलारी नस्ल को सबसे लोकप्रिय और मजबूत माना जाता है. यह नस्ल गर्म और सूखे इलाकों में आसानी से रह सकती है. हलारी गधा शरीर से मजबूत होता है और वजन ढोने की क्षमता भी अच्छी होती है. जहां पानी और चारे की कमी रहती है, वहां भी यह आसानी से जीवित रह सकता है. इसी वजह से कई पशुपालक इस नस्ल को ज्यादा पसंद करते हैं.
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कच्छी नस्ल लंबी दूरी के काम में उपयोगी
कच्छी नस्ल भी गधा पालन के लिए एक अच्छा विकल्प मानी जाती है. यह नस्ल लंबी दूरी तक वजन ढोने की क्षमता के लिए जानी जाती है. निर्माण कार्य, ईंट भट्टों और खेतों में सामग्री ढुलाई के लिए कच्छी गधे का इस्तेमाल किया जाता है. यह कम चारे में भी काम चला लेता है. हालांकि कुछ इलाकों में यह नस्ल कम मिलती है, लेकिन जहां उपलब्ध हो, वहां यह कमाई का अच्छा साधन बन सकती है.
आसान देखभाल और कम खर्च में पालन
गधा पालन की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान देखभाल है. सूखी घास, भूसा और सामान्य चारा इसके लिए काफी होता है. बस साफ पानी, खुली जगह और छाया वाला शेड जरूरी होता है. बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर टीकाकरण और पशु चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है. अगर शुरुआत में दो या तीन गधों से पालन शुरू किया जाए, तो धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर छोटा व्यवसाय बनाया जा सकता है.
गधा पालन से कमाई के कई रास्ते हैं. मजदूरी के काम में किराए पर देने से नियमित आय हो सकती है. कुछ जगहों पर गधी का दूध भी अच्छे दामों में बिकता है. एक स्वस्थ मादा गधी हर साल एक बच्चे को जन्म देती है, जिससे पशुओं की संख्या बढ़ती रहती है. अगर गधा खरीदते समय उसकी उम्र, स्वास्थ्य और नस्ल की जांच कर ली जाए और भरोसेमंद जगह से खरीदारी की जाए, तो यह काम लंबे समय तक फायदा दे सकता है. सही देखभाल और योजना के साथ गधा पालन ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी कमाई का साधन बन सकता है.