Rajasthan Animal Husbandry : राजस्थान को हमेशा भेड़ों और ऊंटों का प्रदेश माना जाता रहा है, लेकिन अब यहां पशुपालन की तस्वीर तेजी से बदल रही है. रेतीले इलाकों से लेकर खेत-खलिहानों तक भैंसों की संख्या ने सबको चौंका दिया है. हालात यह हैं कि भेड़ों के गढ़ में अब भैंसों के साथ बकरियों का बोलबाला नजर आ रहा है. इसी बदलती तस्वीर को सामने लाने के लिए राज्य में 21वीं पशुधन गणना शुरू हुई है, जिसमें गाय-भैंस से लेकर बकरी, गधा और ऊंट तक की गिनती हो रही है. यह पहल पशुपालकों के भविष्य की मजबूत नींव रख रही है. इसके साथ ही बताया जा रहा है कि 21वीं पशुधन गणना में इस बार के पशुओं की संख्या में इजाफा देखा जा सकता है.
21वीं पशुधन गणना- क्यों है इतनी अहम
राजस्थान में 21वीं पशुधन गणना (21st Livestock Census) की शुरुआत हो चुकी है. देश में पशुधन गणना हर पांच साल में होती है. पहली गणना 1919 में हुई थी, जबकि पिछली यानी 20वीं गणना 2019 में पूरी की गई थी. इस बार राज्य और केंद्र सरकार का मकसद है कि पशुपालन क्षेत्र की सही तस्वीर सामने आए. इस गणना में कुल 15 तरह के पालतू पशुओं की गिनती की जा रही है. इसमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट, घोड़ा, टट्टू, गधा, खच्चर, सुअर, कुत्ता, खरगोश, मुर्गी के साथ याक जैसे पशु भी शामिल हैं. इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की योजनाएं तय होंगी.
क्या कहते है आंकड़े
20वीं पशुधन गणना के अनुसार, राजस्थान पशुधन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. श्रीगंगानगर जिले में 2,00,125 भैंस और 303487 बकरी दर्ज की गई थीं. वहीं हनुमानगढ़ जिले में 3,02,203 भैंस और 170021 बकरी पाई गई थीं. पूरे राज्य में गाय-भैंस, बकरी, भेड़ और अन्य पशुओं की कुल संख्या करीब 5.68 करोड़ थी. इसमें ऊंट, गधा, खच्चर, टट्टू और सूअर जैसे पशु भी शामिल थे. अधिकारियों का अनुमान है कि इस बार खासकर गाय, भैंस और भेड़ों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है.
सरकारी योजनाओं से बढ़ा पशुपालन का भरोसा
राज्य सरकार बीते कुछ वर्षों से पशुपालन को आर्थिक मजबूती देने पर लगातार काम कर रही है. पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार, नस्ल सुधार कार्यक्रम और चारा विकास योजनाओं से पशुपालकों को सीधा फायदा मिला है. इन्हीं प्रयासों का असर है कि अब पशुपालन सिर्फ परंपरागत काम नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण आय का मजबूत जरिया बन गया है. पशुधन गणना से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस तरह की योजना की जरूरत है.
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना
राजस्थान सरकार की सबसे बड़ी और अहम पहल है मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना. इसके तहत देशी और संकर दूध देने वाले पशु जैसे गाय-भैंस, बड़े पशु जैसे ऊंट-ऊंटनी और छोटे पालतू पशु जैसे बकरी-भेड़ का एक साल के लिए मुफ्त बीमा किया जाएगा. सरकारी बजट घोषणा के अनुसार, पहले चरण में करीब 21 लाख पशुओं का बीमा किया जाना है. इससे किसी बीमारी, दुर्घटना या आपदा की स्थिति में पशुपालकों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा. पशु स्वास्थ्य और देखभाल पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा.
किसानों और पशुपालकों को क्या होंगे फायदे
पशुधन गणना पूरी होने के बाद सरकार के पास सटीक आंकड़े होंगे, जिससे योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा. बीमा सुरक्षा से पशुपालकों का जोखिम कम होगा और वे निडर होकर पशुपालन में निवेश कर पाएंगे. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पशुपालन राज्य की अर्थव्यवस्था को और मजबूती देगा. साफ है कि 21वीं पशुधन गणना सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजस्थान के पशुपालकों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की नींव है.