India Milk Production: भैंस नहीं तो दूध नहीं! देश की दूध जरूरत पूरी करने का बोझ संभाल रहीं भैंसें

ताजा पशुपालन आंकड़े बताते हैं कि भारत का डेयरी सेक्टर विविध पशुधन पर आधारित है. भैंस, क्रॉसब्रीड और देसी गायें मिलकर देश के दूध उत्पादन को संभाल रही हैं. यही विविधता ग्रामीण परिवारों की आमदनी, रोजगार और डेयरी अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jan, 2026 | 12:23 PM

India Milk Production : भारत में दूध सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी है. खेत-खलिहान से लेकर शहरों की रसोई तक, दूध हर घर की जरूरत बना हुआ है. बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश का डेयरी सेक्टर कितनी मजबूती से आगे बढ़ रहा है और इसमें अलग-अलग पशु प्रजातियों की कितनी अहम भूमिका है. बुनियादी पशुपालन आंकड़ों के अनुसार, भारत का दूध उत्पादन विविध पशुधन पर टिका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लगातार सहारा दे रहा है.

भैंस बनी दूध उत्पादन की रीढ़

बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS) 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल दूध उत्पादन  में सबसे बड़ा योगदान देसी भैंसों का है. करीब 31 प्रतिशत से ज्यादा दूध अकेले भैंसों से आ रहा है. इसकी बड़ी वजह यह है कि भैंस का दूध वसा से भरपूर होता है और इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है. ग्रामीण इलाकों  में भैंस पालन को सुरक्षित निवेश माना जाता है, क्योंकि कम संख्या में पशु रखकर भी अच्छी आमदनी हो जाती है. यही कारण है कि भैंस आज भी भारत के डेयरी सेक्टर की मजबूत रीढ़ बनी हुई है.

क्रॉसब्रीड गायों की बढ़ती हिस्सेदारी

दूध उत्पादन में दूसरा बड़ा योगदान क्रॉसब्रीड गायों  (Crossbreed Cows) का है, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत से अधिक है. बेहतर नस्ल, संतुलित आहार और आधुनिक देखभाल की वजह से इन गायों से ज्यादा दूध मिलता है. बीते कुछ वर्षों में किसानों ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया है, जिससे क्रॉसब्रीड गायों की संख्या और उत्पादन दोनों में तेजी आई है. इससे यह साफ है कि तकनीक और प्रशिक्षण डेयरी सेक्टर  को नई दिशा दे रहे हैं.

India Milk Production, Dairy Sector, Buffalo Milk, Crossbred Cattle, Indigenous Cattle

बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स

देसी गायों का अहम योगदान

हालांकि देसी गायों  की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन उनका महत्व किसी से कम नहीं है. देसी गायों का दूध स्वास्थ्य के लिहाज से खास माना जाता है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ये गायें कम खर्च में पाली जा सकती हैं और स्थानीय मौसम के हिसाब से जल्दी ढल जाती हैं. कई राज्यों में देसी नस्लों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं भी चल रही हैं, जिससे आने वाले समय में इनका योगदान और बढ़ सकता है.

विविध पशुधन से मजबूत डेयरी सेक्टर

दूध उत्पादन में बाकी हिस्सेदारी अन्य पशुधन से आती है, जो यह दिखाती है कि भारत का डेयरी सेक्टर  किसी एक प्रजाति पर निर्भर नहीं है. यही विविधता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है. अलग-अलग पशुओं के सहारे दूध उत्पादन बना रहता है और किसानों की आमदनी सुरक्षित रहती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही नीति, बेहतर नस्ल, संतुलित आहार और सहकारी व्यवस्था  को मजबूत किया जाए, तो भारत का डेयरी सेक्टर आने वाले वर्षों में और ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है