तीन विदेशी बकरियां जो रोज देती हैं 5 लीटर तक दूध, पशुपालकों के लिए बनीं कैश मशीन!

विदेशी नस्लों की बकरियां किसानों की कमाई तेजी से बढ़ा रही हैं, क्योंकि ये हर दिन ज्यादा दूध देती हैं और इनका मांस भी महंगा बिकता है. इनके दूध की मांग शहरों और गांव दोनों जगह तेज़ी से बढ़ी है. कम खर्च और ज्यादा लाभ की वजह से किसान बड़ी संख्या में इन नस्लों की ओर बढ़ रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 Nov, 2025 | 06:00 AM

Goat Farming : आज खेती-बाड़ी सिर्फ जमीन और फसल तक सीमित नहीं रही है. किसानों की नजर अब ऐसे विकल्पों पर भी है, जो कम जगह में ज्यादा आमदनी दे सकें. इन्हीं में से एक है-बकरी पालन. लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि बहुत से किसानों के पास अच्छी नस्लों की सही जानकारी नहीं होती. विदेशी नस्लों की बकरियां आज भारतीय किसानों की पहली पसंद बन रही हैं, क्योंकि इनका दूध उत्पादन एक देसी गाय के बराबर होता है. यानी एक ही बकरी हर दिन 4 से 5 लीटर तक दूध दे सकती है, जो किसानों के लिए बड़ी कमाई का मौका है. यही वजह है कि बकरी पालन धीरे-धीरे ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक फैल रहा है. विदेशी नस्लों की खासियत यह है कि ये वजन तेजी से बढ़ाती हैं, दूध ज्यादा देती हैं और इनके दूध व घी की बाजार में कीमत भी अच्छी मिलती है. आइए जानते हैं ऐसी ही तीन बेहतरीन विदेशी नस्लों के बारे में, जिनकी खेती आज किसानों की कमाई बदल सकती है.

एंग्लो नूबियन: देसी गाय जितना दूध देने वाली विदेशी नस्ल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एंग्लो नूबियन नस्ल को दुनिया की सबसे ज्यादा दूध देने वाली बकरियों  में गिना जाता है. इस नस्ल का पालन बड़े पैमाने पर यूरोप में होता है और अब भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि एंग्लो नूबियन बकरी एक दिन में औसतन 4.5 से 5 लीटर तक दूध दे सकती है. इसके दूध में फैट की मात्रा भी अधिक होती है, जिससे घी और पनीर  की क्वालिटी बेहतर बनती है. इस नस्ल के बकरे लंबे और भारी होते हैं, जिससे मांस उत्पादन भी उत्कृष्ट होता है. किसान कम समय में ज्यादा वजन पाने के कारण इन्हें मांस के लिए भी पालते हैं. एंग्लो नूबियन का स्वभाव शांत रहता है और ये गर्मी के मौसम में भी अच्छे से एडजस्ट हो जाती हैं, जो भारतीय परिस्थितियों के लिए इसे उपयुक्त बनाता है.

सानेन: स्विट्जरलैंड की सबसे मशहूर दुग्ध देने वाली बकरी

सानेन बकरी को डैरी क्वीन भी कहा जाता है, क्योंकि यह लगातार और अधिक मात्रा में दूध देती है. स्विट्जरलैंड में पाली जाने वाली यह नस्ल भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. सानेन बकरी  रोजाना 3.5 से 4 लीटर तक दूध देती है. इसकी खास बात यह है कि सानेन का दूध हल्का और पचने में आसान होता है, जिस कारण शहरों में इसकी मांग अधिक है. इसका सफेद रंग, पतला चेहरा और आकर्षक शरीर इसे देखने में भी खास बनाता है. इसके अलावा यह नस्ल 9 महीने की उम्र में ही प्रजनन के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी-जल्दी इसका बढ़ता हुआ झुंड बना सकते हैं. सानेन के बकरे भी अच्छे वजन वाले होते हैं और इनके मांस की बाजार में बेहतर कीमत मिलती है.

टोगेनबर्ग: सुंदर दिखने वाली और लगातार दूध देने वाली नस्ल

स्विट्जरलैंड में पाई जाने वाली टोगेनबर्ग नस्ल दुनिया की सबसे पुरानी और विश्वसनीय दुग्ध देने वाली नस्लों  में से एक है. इस नस्ल की सबसे खास बात इसका सुंदर रंग है- भूरा और सफेद. इनका चेहरा आकर्षक होता है और अधिकतर बकरियों के सींग भी नहीं होते, जिससे ये देखने में बहुत प्यारी लगती हैं. टोगेनबर्ग बकरी रोज 4 से 4.5 लीटर दूध देने के लिए जानी जाती है. इनके दूध में मिठास और गाढ़ापन अधिक होता है, जिसे बाजार में खास पसंद किया जाता है. कई परिवार तो इन्हें पालतू पशु की तरह भी रखते हैं, क्योंकि ये शांत स्वभाव की और बेहद सौम्य होती हैं. भारतीय मौसम में यह नस्ल आसानी से ढल जाती है और कम देखभाल में भी अच्छा दूध उत्पादन करती है. यही कारण है कि कई किसान अब टोगेनबर्ग बकरी पालन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

विदेशी नस्लों की बकरियों से कमाई कैसे बढ़ती है?

भारतीय बाजारों में विदेशी नस्लों के दूध, मांस और घी की कीमत ज्यादा मिलती है. इनका दूध देसी बकरी की तुलना में लगभग दोगुना होता है. यही कारण है कि एक ही बकरी किसान को रोजाना 200 से 250 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई दे सकती है. इसके अलावा इनका मांस भी उच्च गुणवत्ता  वाला होता है, जिसका रेट बाजार में हमेशा स्थिर रहता है. विदेशी नस्लों की बकरियां तेजी से वजन बढ़ाती हैं, जिससे इन्हें बेचने पर अच्छा मुनाफा मिलता है.

बकरी पालन एक सुरक्षित और स्थिर आय का साधन

मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि बकरी पालन आज किसानों के लिए एक सुरक्षित आय का विकल्प बन चुका है. यह ऐसा व्यवसाय है जिसमें लागत कम और मुनाफा अधिक मिलता है. विदेशी नस्लों की बकरियां वजन और दूध, दोनों में बेहतर होती हैं, जिससे कम समय में बड़ा झुंड तैयार हो जाता है. इन नस्लों का दूध, घी और मांस उच्च दामों पर बिकता है, इसलिए किसान सालभर आमदनी कमा सकते हैं. अगर किसान सही नस्ल चुन लें, समय पर देखभाल करें और प्रजनन का ध्यान रखें, तो वे बकरी पालन से लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं.

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Published: 17 Nov, 2025 | 06:00 AM
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