केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में सहकारी दुग्ध समिति मधुर डेयरी का शुभारंभ किया है. 128 करोड़ की लागत वाली यह डेयरी शुरुआत में हर रोज किसानों का 2.5 लाख लीटर दूध प्रॉसेस करेगी. धीरे-धीरे यह प्रॉसेसिंग क्षमता बढ़कर 5 लाख लीटर रोजाना की होगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र किसानों के लिए तेजी से काम कर रहा है और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है.
गुजरात के गांधीनगर जिले के दशीला गांव में स्थित मधुर डेयरी के अत्याधुनिक फुली ऑटोमेटेड मिल्क प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग यूनिट का उद्घाटन रविवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया. यह परियोजना राज्य के डेयरी सहकारी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता के जरिए किसानों और ग्रामीणों का विकास किया जा रहा है. दूध समितियों के जरिए किसानों का दूध खरीद कर उन्हें बाजार भाव से अच्छा दाम दिया जा रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में मददगार साबित हो रहा है.
सहकारी मॉडल से आर्थिक सशक्तिकरण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमूल फेडरेशन से संबद्ध मधुर डेयरी एक सहकारी संस्था के रूप में कार्य कर रही है, जिसका उद्देश्य दूध उत्पादकों को उचित मूल्य उपलब्ध कराना और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद देना है. वर्ष 1971 में केवल कुछ दुग्ध समितियों के साथ शुरू हुई यह डेयरी आज लाखों लीटर दूध प्रॉसेसिंग क्षमता तक पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि नई डेयरी प्लांट से इलाके के हजारों दूध किसानों को लाभ मिलेगा.
किसानों से हर दिन 2.5 लाख दूध खरीद करेगी मधुर डेयरी
करीब 128 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मधुर डेयरी के इस आधुनिक प्लांट की प्रारंभिक क्षमता 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन है, जिसे जरूरत पड़ने पर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही मधुर डेयरी की कुल प्रॉसेसिंग क्षमता भी 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जिससे यह गांधीनगर जिले की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी यूनियन बन गई है. इन डेयरी को दूध की सप्लाई स्थानीय किसानों के जरिए की जाएगी.
दूध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मधुर डेयरी के इस नए प्लांट के शुरू होने से किसानों को उनके दूध का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को बढ़िया क्वालिटी वाले दूध और अन्य डेयरी उत्पाद मिल सकेंगे. इससे सहकारी मॉडल को और मजबूती मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों को डेयरी क्षेत्र में उतरने का प्रोत्साहन भी मिलेगा.