Mango Export Crisis: आखिर क्यों जापान ने लगाई भारतीय आमों पर रोक? समझिए क्या है पूरा विवाद
Japan Mango Import Ban: जापान ने फ्यूमिगेशन और फाइटोसैनिटरी मानकों में कमियां पाए जाने के बाद भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है. इससे अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी लोकप्रिय आम किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ है. मार्च 2026 के बाद जारी निरीक्षण प्रमाणपत्र वाली खेपों को जापान में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
Indian Mango Export: भारत के आम निर्यात कारोबार को इस सीजन में बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है. जापान ने भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके चलते कई निर्यातकों की सप्लाई अचानक रुक गई है. इस फैसले का असर खासतौर पर प्रीमियम क्वालिटी वाले भारतीय आमों के कारोबार पर पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि जापान ने यह कदम फ्यूमिगेशन और पौधों की सुरक्षा से जुड़े मानकों में कमियां पाए जाने के बाद उठाया है.
क्या है पूरा विवाद?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में जापान के प्लांट क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारत के कुछ ट्रीटमेंट सेंटरों का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान फ्यूमिगेशन प्रक्रिया और उससे जुड़े इंतजामों में कई तकनीकी कमियां पाई गईं. फ्यूमिगेशन एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें जहरीली गैस का इस्तेमाल करके फलों में मौजूद कीट और संक्रमण खत्म किए जाते हैं, ताकि निर्यात होने वाले फल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुरक्षित माने जाएं.
इन खामियों के सामने आने के बाद जापान ने सख्त कदम उठाते हुए भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया. इससे आम निर्यातकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है.
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जापान के आदेश में क्या कहा गया?
योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने कहा है कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद जारी जांच सर्टिफिकेट वाले भारतीय आम अब जापान में नहीं लिए जाएंगे. संस्था का कहना है कि जब तक भारत आमों की सफाई, कीट नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े नियमों में जरूरी सुधार नहीं करता, तब तक जापान भारतीय ताजे आमों का आयात बंद रखेगा. इस फैसले से आम कारोबार और निर्यातकों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है.
किन आम किस्मों पर पड़ा असर?
जापान के इस फैसले का असर भारत की कई लोकप्रिय और प्रीमियम आम किस्मों पर पड़ा है. इनमें मुख्य रूप से:
- अल्फांसो
- केसर
- लंगड़ा
- बंगनपल्ली
जैसी प्रीमियम आम की किस्में शामिल हैं. इन आमों की जापान में अच्छी मांग रहती है, लेकिन अब इनकी सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है.
निर्यातकों की बढ़ी चिंता
भारत में आमों के निर्यात का मेन सीजन अप्रैल से जून तक माना जाता है. लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि समस्या का समाधान हुए बिना ही यह सीजन खत्म हो सकता है. हालांकि जापान भारत का सबसे बड़ा आम आयातक देश नहीं है, लेकिन उसे प्रीमियम मार्केट माना जाता है, जहां भारतीय आमों की अच्छी कीमत और खास पहचान होती है. ऐसे में जापान को निर्यात रुकने से आम कारोबारियों और निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
एयर कार्गो लागत ने बढ़ाई परेशानी
निर्यातकों का कहना है कि, इस बार सिर्फ जापान की रोक ही चिंता का कारण नहीं है, बल्कि एयर कार्गो का बढ़ता खर्च भी बड़ी समस्या बन गया है. पहले विदेशों में आम भेजने का खर्च करीब 250 से 350 रुपये प्रति किलो पड़ता था, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 580 से 590 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव, जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बदले हुए रूट मुख्य वजह हैं. बढ़ती लागत का सीधा असर आम निर्यात कारोबार और व्यापारियों की कमाई पर पड़ रहा है.
सरकार कर रही समाधान की कोशिश
निर्यातकों के मुताबिक, भारतीय अधिकारी जापान के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि जरूरी फाइटोसैनिटरी यानी पौध सुरक्षा मानकों को जल्द पूरा किया जा सके. भारत से आम निर्यात के लिए कृषि मंत्रालय के अधीन एजेंसियां फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट जारी करती हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि फल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुरक्षित हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत जल्द ही ट्रीटमेंट और फ्यूमिगेशन प्रक्रियाओं में सुधार कर लेता है, तो जापान के साथ भारतीय आमों का निर्यात फिर से शुरू हो सकता है.